बरेली में चाय पर चर्चा के बाद 'अमर उजाला' का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' महिलाओं के बीच पहुंचा। यहां महिलाओं ने खुलकर आने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर चर्चा की। बताया कि इस बार किन मुद्दों पर महिलाएं वोट करेंगी।
बरेली की महिलाएं चुनाव को क्या लेकर सोच रहीं हैं? क्या महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस करती हैं? पिछले साढ़े चार साल की योगी सरकार में महिलाओं को कितना रोजगार मिला? क्या महिलाएं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतियों से खुश हैं या अब उनका विकल्प तलाशने लगी हैं ? महिलाओं के कौन से मुद्दे हैं, जहां अभी तक सरकार की नजर नहीं गई है? किन मुद्दों पर सरकार को काम करने की जरूरत है?
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इन सवालों का जवाब जानने के लिए 'अमर उजाला' का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' बरेली की महिलाओं के बीच पहुंचा। यहां जनकपुरी में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं ने शिरकत की। पढ़िए किसने क्या कहा?
महिला सुरक्षा पर क्या बोली महिलाएं?
बरेली में चुनावी मुद्दों पर चर्चा करते हुए महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
शिक्षिका रचना सक्सेना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। कहा कि इसपर सरकार को बड़े पैमाने पर योजना चलाने की जरूरत है। छोटी बच्चियों और लड़कियों के साथ जो घटनाएं हो रहीं हैं, वो बहुत डराने वाली हैं। इसके खिलाफ सरकार को सख्त कदम उठाने की जरूरत है।
डॉक्टर मनु नीरज ने कहा कि महिला शक्ति अभियान चला उसके बाद भी कोई असर नहीं पड़ा। हाल ही में पीलीभीत में महिला सिपाही के साथ छेड़छाड़ की घटना हुई। उसके बाद भी अपराधियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। सवाल ये भी है कि उस महिला ने आखिर क्यों नहीं रिपोर्ट लिखवाई है। छेड़खानी जैसी घटनाएं अब हर रोज हो रही हैं।
स्वाती गुप्ता ने कहा कि 2014 में एंटी रोमियो स्क्वायड रखा गया था। मेरी बेटी बहुत खुश थी। अब नहीं मालूम कि वो एंटी रोमियो स्क्वायड नहीं दिखती है। सरकार से अपेक्षा रखते हैं कि पुलिस ऑफिसर भी हमें सम्मान दें।
क्षमा गुप्ता ने कहा कि महिलाएं पहले के मुकाबले काफी सुरक्षित हैं। सड़कों पर काफी कैमरे लगे हैं। अगर हम 112 पर फोन करते हैं तो पुलिस आती है। हालांकि ज्यादातर लोगों ने कहा कि मौजूदा सरकार ने अच्छा काम किया है। ऋषि सक्सेना ने कहा कि बरेली में पहले के मुकाबले लड़कियों की सुरक्षा काफी बढ़ी है। हालांकि, अभी इसमें काफी काम करने की जरूरत है।
सरकारी योजनाओं पर क्या राय?
आधी आबादी की बात कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं ने शिरकत की।
- फोटो : अमर उजाला
अर्चना बब्बर ने कहा कि योगी और मोदी सरकार ने महिलाओं के लिए कई योजनाएं चलाई हैं। ये अच्छी बात है। हालांकि, अभी समस्या ये है कि बहुत सारे जरूरतमंद लोगों तक इन योजनाओं की जानकारी नहीं है। कई लोग इसका लाभ नहीं उठा पाते हैं। गांवों में अभी तक महिलाओं के लिए चलाए जाने वाली योजनाओं की जानकारी लोगों तक नहीं पहुंच पाती हैं। सरकार और एनजीओ को मिलकर इसपे काम करना चाहिए।
निधि श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार ने कई तरह की योजनाएं लागू की हैं। युवाओं के रोजगार, महिलाओं के स्वरोजगार के लिए काम हो रहे हैं। पहले ये नहीं होता था। लड़कियां भी पूरी तरह सुरक्षित हैं। भ्रष्टाचार में काफी कमी आई है। महिलाओं को सरकार ने सशक्त किया है।
रश्मि प्रधान ने कहा कि कोई भी सरकार जादू नहीं कर सकती है। कमियां हर जगह होती हैं, लेकिन पहले के मुकाबले काफी काम हुए हैं। हमारी मूलभूत सुविधाओं में काफी बदलाव आया है। अभी मौजूदा सरकार को अधिक समय देने की जरूरत है। सड़कें अच्छी हुई हैं। साफ-सफाई की व्यवस्था बेहतर हुई है।
शिल्पी अरोड़ा ने कहा कि सड़कें बन रही हैं लेकिन कई जगह गड्डे हैं। सड़कों को तैयार करने में क्वालिटी पर फोकस नहीं किया जाता है। पार्किंग और रोड मैनेजमेंट की बड़ी समस्या है। समन ने कहा कि सरकार मेहनत कर रही है, लेकिन ज्यादा फोकस नहीं कर रही है। सड़कों को बनाने में क्वालिटी को जरूर देखना चाहिए।
किरण पाठक ने घरेलू महिलाओं के रोजगार का मुद्दा उठाया। कहा कि महिलाओं के लिए काम मिलना चाहिए। डंपिंग की समस्या बड़ी है। साफ-सफाई की व्यवस्था बेहतर होनी चाहिए।
शालिनी जौहरी ने कहा कि गंदगी को लेकर आम लोगों को जिम्मेदार ठहराया। कहा कि लोग आज भी कूड़ा सड़कों पर फेंक रहे हैं। गुटखा खाकर लोग सड़क पर थूकते हैं। उज्जवला योजना के तहत गरीब महिलाओं को गैस सिलेंडर मिला है।
प्रियंका ने कहा कि बरेली में सुरक्षा और रोजगार पर काम करने की जरूरत है।
सुधा सक्सेना ने कहा कि महिलाओं के रोजगार के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लोगों को जागरूकता की कमी है। लोगों को मुफ्त ट्रेनिंग दी जा रही है।
पूनम ने कहा कि गंदगी बहुत है। कचड़ा उठाने वाला नहीं आता है। आगे बताया कि कई समूह है, जो महिलाओं को रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं।
रेनू सक्सेना ने कहा कि महिलाओं की शिक्षा की कमी है। बहुत सी योजनाएं हैं, बस लोगों को उसकी सही जानकारी नहीं है। अगर किसी को कुछ काम करना है तो उसे थोड़ी मेहनत करनी होगी।
हर्षिता ने कहा कि शिक्षा और युवाओं के लिए रोजगार की बड़ी समस्या है। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसी और भी योजना चलनी चाहिए।
प्रतिक्षा शर्मा ने कहा कि बहुत से संगठन लोगों को योजनाओं की जानकारी दे रहीं हैं। आम लोगों को भी थोड़ी मशक्कत करनी होगी, तभी वो इन योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे।
प्रतिभा जौहरी ने कहा कि योगी सरकार में डोर टू डोर कलेक्शन की व्यवस्था की है। 50 रुपए देने होते हैं, लेकिन उसे भी कोई नहीं देना चाहता है। लोग छतों से कूड़ा फेंकते हैं। आम लोगों को अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए। महिलाएं काफी सुरक्षित हैं।
मंगलेश सक्सेना ने कहा कि आम लोगों की समस्या रोटी, कपड़ा और मकान की होती है, लेकिन ये सभी को मिल रहा है।
रेनू वर्मा ने कहा कि हमें खुद को जागरूक होना है और सरकार से कहना है कि हमें रोजगार उपलब्ध कराएं।