यूपी के तमाम दलों सपा, बसपा, बीजेपी, शिवसेना, पीस पार्टी आदि के वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधियों का आपराधिक रिकॉर्ड शासन ने तलब किया है।
छह बिंदुओं पर हर जिले के पुलिस प्रमुखों से रिपोर्ट मांगी गई है। पुलिस पुरानी फाइलों को खंगालकर रिपोर्ट तैयार करने में लगी है।
शासन के संयुक्त सचिव के हवाले से प्रदेश के तमाम जिलों से सपा, कांग्रेस, भाजपा, बसपा, पीस पार्टी, शिव सेना आदि दलों के वर्तमान जनप्रतिनिधियों, पूर्व सांसदों, विधायकों के खिलाफ दर्ज मुकदमों के बारे में जानकारी हासिल की गई है।
ऐसा पहली बार हुआ जब शासन स्तर से सत्ताधारी दल के नेताओं का आपराधिक रिकार्ड खंगाला जा रहा है। अमूमन पहले विपक्ष के नेताओं के इतिहास को अपडेट किया जाता था।
पुलिस प्रमुखों से छह बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी गई है। मसलन, नाम क्या है, किस दल से जुड़े हैं, कितने मुकदमे हैं, कितने लंबित हैं, कितने में बरी हुए और वर्तमान स्थिति क्या है।
पुलिस इन नेताओं का पुराना रिकार्ड खंगाल कर अपडेट करने में जुटी है। दो दिन में यह रिपोर्ट दी जानी है। स्थानीय अभिसूचना इकाई अलग से नेताओं का अपराधिक खाका तैयार कर रही है।
हालांकि यह साफ नहीं है कि अपराधों की अपडेट रिपोर्ट किस मकसद से मांगी जा रही है।
संभावना जताई जा रही है कि लोकसभा चुनाव के मद्देनजर यह आंकलन कराया जा रहा है कि किन-किन नेताओं के खिलाफ संगीन जुर्म हैं और दलगत आधार पर किस पार्टी के नेताओं पर सबसे ज्यादा मुकदमे हैं।