नाव में बैठकर खेतों से वापस देवीपुरवा गांव जाते ग्रामीण। संवाद
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बीघापुर। गंगा के बढ़े जलस्तर से तहसील क्षेत्र की दो ग्रामसभाओं में सैकड़ों बीघा फसलें जलमग्न होने से परेशान किसानों को शनिवार रात से ठहरे पानी ने मामूली राहत दी है। हालांकि बाढ़ का खतरा कम न होने से किसान रात-दिन जलस्तर पर नजर रख रहे हैं।
गंगा व पांडु नदी की बीच बसी लालखेड़ा व दुलीखेड़ा की सैकड़ों बीघा फसल जलमगभन हो गई है। लगातार बढ़ रहे जलस्तर को देखते हुए पानी के गांवों के अंदर घुसने की आशंका बढ़ गई थी। हालांकि शनिवार रात से जलस्तर में ठहराव से लोगों ने राहत की सांस ली।
चौड़ापुरवा निवासी आशीष यादव ने बताया कि बाढ़ के चलते सैकड़ों बीघा फसल जल में डूब जाने के चलते किसानों को भारी नुकसान हुआ है। वहीं, अभी भी प्रशासन द्वारा कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। दूलीखेड़ा निवासी वीरेंद्र यादव ने कहा कि पांडु नदी भी उफान पर है। ग्राम सभाओं के मजरों में आने जाने के लिए पांडु नदी में लोग नाव से आवागमन कर रहे हैं। ग्राम प्रधान श्रीकृष्ण यादव ने बताया कि तहसील प्रशासन को ग्रामसभा की समस्याओं से अवगत करा दिया गया है। वहीं तहसील क्षेत्र की गढे़वा व करमी ग्रामसभा में जलस्तर बढ़ने से जहां हजारों बीघा भूमि कटान के चलते गंगा में समा गई है।
गढे़वा निवासी किसान प्रदीप शुक्ला ने बताया कि शनिवार को गंगा के जलस्तर में ठहराव रहा है। यदि गंगा एक फीट और बढ़ती हैं तो गांव के अंदर पानी आ जाएगा। पूर्व प्रधान योगेंद्र सिंह ने बताया कि बाढ़ और कटान के चलते गढ़ेवा के मजरे सहिबीखेड़ा के अस्तित्व पर संकट है। वहीं, गढ़ेवा में गंगा नदी पर बने पुल से गांव को जोड़ने वाली सड़क कट सकती है और आवागमन बंद हो सकता है।
परियर में पशुओं के चारे की समस्या हुई गंभीर
परियर संवाद के अनुसार रविवार को जलस्तर घटा लेकिन इसके बाद भी प्रभावित गांव के ग्रामीणों की समस्या कम नहीं हुई है। गंगा नदी के किनारे की अधिकांश भूमि पर पानी भर जाने से पशुओं के चारे की समस्या उत्पन्न हो गई है। ग्रामीण नाव से आवागमन कर रहे हैं। शनिवार को जहां गंगा का जलस्तर 111.850 मीटर पर था। वहीं, रविवार को घटकर 111.710 मीटर पर पहुंच गया। इसके बाद भी ग्रामीण पानी पर दिन-रात नजर रख रहे हैं।