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..नफरत के दौर में भी प्यार बांटता हूं

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कमला भवन में आयोजित साहित्य भारती के कवि सम्मेलन में कवितापाठ करते डॉ. हरिओम पवार। - फोटो : UNNAO
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उन्नाव। साहित्यिक संस्था साहित्य भारती के तत्वावधान में 26वें काव्य समारोह में कवियों ने रचनाएं सुनाकर तालियां बटोरी। डॉ. विष्णु सक्सेना की रचना तपती हुयी जमीं है जलधार बांटता हूं, पतझर के रास्तों पर मैं बहार बांटता हूं। ये आग का है दरिया जीना भी बहुत मुश्किल, नफरत के दौर में भी मैं प्यार बांटता हूं, खूब सराई गई।
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कवि व पूर्व सांसद उदय प्रताप सिंह ने पढ़ा कि जब से संभाला होश, मेरी काव्य चेतना में आती-जाती रही चांदनी। कवि डॉ. हरिओम पवार ने मैं भारत का संविधान हूं, लालकिले से बोल रहा हूं, रचना सुनाई। कवि शंभू शिखर ने राजनीति पर कटाक्ष करते हुए कहा कि तुम तोड़ो वादा और हम निभाते रहेंगे, नाराजगी ऐसे भी हम जताते रहेंगे, जब तक नहीं आते हैं 15 लाख खाते में, तब तक तुम्हें हम जिताते रहेंगे। अयोध्या से आए जमुना उपाध्याय ने पढ़ा कि, कुछ यूं हुआ कि मैंने कहा आसमां का सच, भक्तों ने आसमान ही सर पर उठा लिया। संचालन करते हुए आईएएस डॉ. अखिलेश मिश्र ने सुनाया, जिंदगी का क्या ठिकाना, हो न हो, कल भी ये मौसम सुहाना, हो न हो सुनाई। कवियत्री सरला शर्मा की रचना, स्वर्ण सुंदर सुरमई बाला हूं मैं, कामनाओं की मधुर हाला हूं मैं, को श्रोताओं ने सराहा।
इस मौके पर राजेंद्र सिंह सेंगर व मोहनलाल मिश्र धीरज की पुस्तकों का विमोचन किया गया। मंच पर परिषद के संस्थापक अतुल मिश्र, चंद्र प्रकाश शुक्ल छुन्ना, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष हरि सहाय मिश्र, मनीष सिंह सेंगर, डॉ. राम नरेश, नीरज अवस्थी, संजय रॉठी, अजेंद्र अवस्थी, गुरुशरण सिंह, संजीव गुप्त, ओपी तिवारी व लक्ष्य निगम मौजूद रहे।
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