उन्नाव। अनुसूचित जाति की किशोरी को ले जाने और दुष्कर्म के मामले में पॉक्सो एक्ट के न्यायाधीश शैलेंद्र सिंह यादव बुधवार अंतिम सुनाई करते हुए फैसला सुनाया। दुष्कर्म के दोषी को सात साल और किशोरी को अगवा कर बेचने वाली दो महिला समेत तीन दोषियों को तीन-तीन साल जेल की सजा सुनाई। सभी पर जुर्माना भी लगाया गया है।
आसीवन थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी अनुसूचित जाति की महिला ने नाबालिग बेटी के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस को बताया था कि 21 जनवरी 2018 को खेत गई बेटी को गांव की ही छाया व रामा ने पास बुलाया और अगवा करके अरविंद कुमार लोधी को उसे 50 हजार रुपये में बेच दिया। अरविंद साथी छोटू उर्फ रामकिशोर निवासीगण नैनीखेड़ा थाना सफीपुर की मदद से किशोरी को बाइक पर बैठा कर भाग गया।
पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था और किशोरी का मेडिकल और कलमबंद बयान दर्ज कराया। पीड़िता ने अरविंद कुमार लोधी पर दुष्कर्म करने की भी बात बताई थी। बांगरमऊ के तत्कालीन सीओ ने चारों के खिलाफ 23 मार्च 2018 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। मुकदमे की सुनवाई पाॅक्सो एक्ट की विशेष न्यायालय नंबर 12 में चल रही थी।
बुधवार को सुनवाई पूरी हुई और न्यायाधीश शैलेंद्र सिंह यादव ने नाबालिग से दुष्कर्म का दोष साबित होने पर अरविंद कुमार लोधी को सात साल सश्रम कारावास और 35 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं उसके सहयोगी छोटू उर्फ रामकिशोर को तीन साल की जेल और 20 हजार रुपये जुर्माना व किशोरी को ले जाने में दोषी महिला छाया व रामा को तीन-तीन साल की जेल और दस-दस हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई।