उन्नाव। खेती-किसानी का मुख्य सीजन न होने के बाद भी खाद की बिक्री तेजी के साथ हो रही है। इसी कारण बिक्री का आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले इस बार ज्यादा हो गया है। अप्रैल में अब तक सात मीट्रिक टन यूरिया ज्यादा बिक चुकी है। डीएपी की भी 111 मीट्रिक टन अधिक खरीद हो गई है। जमाखोरी की बढ़ती आशंका के बीच जिला कृषि अधिकारी ने जांच कराने की बात कही है।
जिले में बोई जाने वाली फसलों में गेहूं, धान और आलू प्रमुख हैं। आलू में डीएपी और गेहूं और धान में यूरिया की सबसे ज्यादा खपत होती है। इनमें नाममात्र की डीएपी लगती है। गेहूं और आलू का सीजन अक्टूबर और नवंबर में शुरू होता है। धान की बेड रोपाई का काम जुलाई में चलता है। इस दौरान डीएपी और यूरिया की बिक्री ज्यादा होती है।
अप्रैल माह जायद का सीजन होता है। इसमें बोई जाने वाली मक्का, मूंग, उड़द की जो फसलें बोई जाती हैं, उनमें खाद की बहुत ज्यादा जरूरत नहीं होती है। इसके विपरीत इस बार अप्रैल में खाद की बिक्री पिछले साल के मुकाबले ज्यादा हो गई है। इसके पीछे का कारण लोग ईरान और अमेरिका-इजराइल युद्ध बता रहे हैं। बताया जाता है कि युद्ध के चलते आने वाले समय में खाद की कमी की सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों को लेकर पहले से ही डीएपी, यूरिया की खरीद में तेजी आ गई है।
पिछले वर्ष 2025 में एक से 20 अप्रैल के बीच 1229 मीट्रिक टन खाद की बिक्री हुई थी। इसमें यूरिया 1054 और डीएपी 175 मीट्रिक टन शामिल थी। इस बार खाद बिक्री का आंकड़ा 1347 मीट्रिक टन पहुंच गया है। यह पिछले साल के मुकाबले 118 मीट्रिक टन ज्यादा। इसमें यूरिया 1061 और डीएपी 286 मीट्रिक टन शामिल है।
इंसेट-1
एनपीके की बिक्री घटी
यूरिया, डीएपी में जहां बिक्री बढ़ी है, वहीं एनपीके की बिक्री में कमी आई है। एनपीके भी एक प्रकार की खाद ही है। हालांकि किसानों में यूरिया, डीएपी को लेकर ज्यादा मांग है। पिछले साल वर्ष 2025 में 97 मीट्रिक टन एनपीके की बिक्री हुई थी। इस बार अभी तक 15 मीट्रिक टन ही बिकी है।
वर्जन...
पिछले साल के मुकाबले इस बार अभी से खाद बिक्री बढ़ गई है। इसका संज्ञान लिया गया है। उर्वरकों की बिक्री बढ़ने के मामलों की जांच कराई जाएगी। यदि कहीं जमाखोरी मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी। -शशांक कुमार, जिला कृषि अधिकारी।
कृषि विभाग के पास खाद का स्टॉक
यूरिया 18501 मीट्रिक टन
डीएपी 6919 मीट्रिक टन
एनपीके 5724 मीट्रिक टन