फोटो-2- औद्यानिक खेती करने वाली रूपा का सम्मानित करतीं सीडीओ कृति राज। संवाद
औरास। विकास खंड के नंदौली गांव की रूपा मौर्या ने सब्जियों की पैदावार से न केवल आत्मनिर्भरता हासिल की बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी इस क्षेत्र में प्रशिक्षित कर सशक्त बना रही हैं। उन्होंने मिर्च और बींस की खेती से अब तक लगभग डेढ़ लाख रुपये की बचत की है।
तीन साल पहले रूपा ने बालाजी महिला स्वयं सहायता समूह का गठन किया था। पारंपरिक गेहूं और धान की खेती छोड़कर वैज्ञानिक विधि से औद्यानिक खेती की शुरुआत की। एक बीघा में मिर्च की खेती से करीब 1.20 लाख रुपये का लाभ हुआ जिसमें 40 हजार रुपये का प्रारंभिक निवेश लगा था। इसके बाद बींस की खेती से भी लगभग 30 हजार रुपये की बचत हुई जिसमें 15 हजार रुपये खर्च हुए।
रूपा केवल अपनी आय ही नहीं बढ़ा रही हैं बल्कि उन्होंने गांव की 10 अन्य महिलाओं को भी खेतीबाड़ी में दक्ष बनाया है। इन महिलाओं को वैज्ञानिक तरीकों से औद्यानिक खेती से जोड़ा है जिससे वे भी आत्मनिर्भर बन रही हैं और परिवार का भरण-पोषण कर पा रही हैं। उनके इस सराहनीय कार्य को देखते हुए सीडीओ कृति राज ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया था।