उन्नाव। सदर तहसील के गजौली गांव के मूल निवासी श्रवण कुमार विश्वकर्मा ने कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प से सफलता की नई मिसाल कायम की है। कभी टेंट हाउस का सामान ढोने और कानपुर-उन्नाव के बीच टेंपो चलाने वाले श्रवण आज शंख एयरलाइन नामक अपनी विमानन कंपनी के मालिक हैं और मार्च 2026 से पहली उड़ान शुरू करने की तैयारी में हैं। उन्हें नागरिक उड्डयन मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) भी मिल गया है।
श्रवण कुमार का बचपन गरीबी में बीता। उनके पिता कानपुर में तांगा के पटे बेचने का काम करते थे। परिवार के साथ उन्नाव शहर के कलक्टरगंज मोहल्ले में रहने वाले श्रवण ने छोटी उम्र से ही कुछ अलग करने की ठानी थी। परिवार के टेंट हाउस में भी काम किया और आर्थिक तंगी के कारण उन्नाव-कानपुर के बीच टेंपो और लोडर चलाकर गुजारा किया। धीरे-धीरे सीमेंट और फिर सरिया के कारोबार में कदम रखा। वर्ष 2017 में, परिवार के साथ कानपुर शिफ्ट होने के बाद, उन्होंने ट्रांसपोर्ट के क्षेत्र में प्रवेश किया। पढ़ाई के साथ-साथ दिन-रात की मेहनत रंग लाई और आज उनके पास 400 ट्रकों और डंपरों का बेड़ा है। हाल ही में उन्हें पेट्रोलियम द्वारा उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाले ट्रांसपोर्टर के रूप में सम्मानित भी किया गया है। वर्तमान में वे लखनऊ के गोमती नगर में रहते हैं।
एयरलाइन की शुरुआत और भविष्य की योजनाएं
24 दिसंबर 2025 को नागरिक उड्डयन मंत्रालय से एयरलाइन के लिए एनओसी प्राप्त करने के बाद, श्रवण कुमार मार्च 2026 से शंख एयरलाइन शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। प्रारंभिक चरण में, कंपनी लखनऊ से दिल्ली, वाराणसी से दिल्ली और गोरखपुर से दिल्ली के बीच उड़ानें संचालित करेगी। यह उत्तर प्रदेश से शुरू होने वाली पहली घरेलू फुल-सर्विस एयरलाइन होगी जिसका उद्देश्य टियर-दो और टियर-तीन शहरों को बेहतर हवाई कनेक्टिविटी प्रदान करना है। शुरुआती दौर में एयर बस ए-320 विमानों का उपयोग किया जाएगा, जिनमें से तीन भारत आने वाले हैं। इसके अतिरिक्त, दो ए-320 नियो विमान खरीदने की भी योजना है।
मध्यम वर्ग पर विशेष ध्यान
श्रवण कुमार का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हवाई चप्पल पहनने वाला भी हवाई जहाज से सफर कर सके के सपने को साकार करना उनकी एयरलाइन का लक्ष्य है। बड़ी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा के सवाल पर वे कहते हैं कि टेंपो चलाने के अनुभव ने उन्हें यात्रियों को आकर्षित करने और सेवा प्रदान करने की बारीकियों को सिखाया है। उनकी एयरलाइन का स्टाफ ऐसा होगा जो हिंदी और अन्य स्थानीय भाषाओं में सहजता से संवाद कर सके, जिससे सभी वर्ग के यात्री सहज महसूस करें। इस प्रकार, श्रवण विश्वकर्मा का सफर अभावों से निकलकर आसमान छूने की प्रेरणा देता है, जहाँ कड़ी मेहनत और दूरदर्शिता से सफलता के शिखर को प्राप्त किया जा सकता है।