फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Unnao News: पेशी से दो दिन पहले जेल में बंद दुष्कर्म के आरोपी बंदी ने फंदा लगाकर जान दी

विज्ञापन
विज्ञापन
उन्नाव। सात साल की मासूम बच्ची को अगवा कर दुष्कर्म करने के आरोप में आठ साल से जेल में बंद आरोपी ने शनिवार दोपहर पेड़ से गमछे का फंदा लगाकर जान दे दी। तीन सितंबर को मुकदमे की सुनवाई थी और फैसला आने की उम्मीद थी।
विज्ञापन

बांगरमऊ कोतवाली के पलिया गांव निवासी 46 वर्षीय सुधीर लोहार ने 28 जुलाई 2016 को एक मोहल्ले में रहने वाली सात साल बच्ची की बच्ची को टॉफी देने के बहाने अगवा किया था। तलाश के दौरान इसकी जानकारी होने पर बच्ची के पिता ने अगले दिन 29 जुलाई 2016 को सुधीर के खिलाफ अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने 30 जुलाई 2016 को बच्ची को आरोपी के घर से बरामद कर उसे गिरफ्तार कर लिया था। बच्ची के कलमबंद बयान के आधार पर तत्कालीन प्रभारी उत्तम सिंह राठौर ने अपहरण, दुष्कर्म, पाक्सो, जानलेवा हमले, जान से मारने की धमकी की धारा में आरोपी सुधीर को जेल भेजा था, तब से वह जेल में था।
जेल अधीक्षक पंकज कुमार सिंह ने बताया कि सुधीर बैरक नंबर 17 में बंद था। दोपहर करीब 12 बजे वह बैरक के पास ही बैठा था। इसी दौरान उसने बैरक नंबर 16-17 के बीच पीपल के पेड़ से गमछे की मदद से फंदा लगा लिया। अन्य बंदियों ने देखा तो सूचना दी। जेल अधिकारियों की सूचना पर फोरेंसिक टीम ने भी जांच की। जेल अधीक्षक ने बताया कि बंदी के बड़े भाई कन्हैयालाल को सूचना दी है। काफी कहने के बाद वह यहां आने को तैयार हुए हैं। बताया कि भाई के आने के बाद पोस्टमार्टम कराया जाएगा।
विज्ञापन


दुष्कर्म में सात साल की सजा काटकर 2016 में छूटा और फिर किया वही कृत्य
सुधीर लोहार से उसके घर-परिवार के लोग भी आजिज आ चुके थे। इससे पहले उसने वर्ष 2010 में एक युवती से दुष्कर्म किया था। उस घटना में सुधीर दोषी साबित हुआ था और उसे सात साल कारावास की सजा हुई थी। परिजनों ने परैवी की तो उसे 2016 में ही न्यायालय के आदेश पर छोड़ दिया गया था। लेकिन जेल से छूटने के बाद गांव पहुंचने के कुछ दिनों बाद ही उसने बच्ची से दुष्कर्म किया। मासूम कई महीने तक जिंदगी और मौत से जूझती रही थी। भाई कन्हैयालाल ने का कहना है कि भाई की हरकतों से परिवार कभी सिर उठाकर नहीं चल सका। उसके चाल चलन से परिवार हमेशा परेशान रहा। जेल से छूटने के बाद उसने दोबारा उससे भी जघन्य अपराध किया। इसी वजह से किसी ने उसकी जमानत का प्रयास नहीं किया।
-
मिला था सरकारी वकील
जेल अधीक्षक ने बताया कि सुधीर ने अपना मुकदमा लड़ने के लिए सरकार की तरफ से वकील की मांग की थी। इस पर अधिवक्ता राजेश त्रिपाठी को उसका मुकदमा दिया गया था। यह मुकदमा निर्णय के करीब था। 30 अगस्त को पेशी थी पर टल गई। तीन सितंबर को फिर पेशी होनी थी। आराेपित को आभास हो गया था कि उसे सजा होनी तय है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें