सूरत से पैदल चलकर उन्नाव के असोहा में अपने गांव पहुंचे युवक।
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असोहा(उन्नाव)। गुजरात के सूरत से पैदल घर के लिए चले युवकों ने 1100 किलोमीटर की दूरी 19 दिन में पूरी कर गांव पहुंचे। खर्च के लिए रुपये न होने पर रास्ते में एक युवक ने 400 रुपये दिए। उसी से कुछ दिन काम चला। बाकी भूखे भी रहना पड़ा।
ब्लॉक के गांव बेहटा निवासी संजय और राधेश्याम गुजरात के सूरत की एक फैक्टरी में 19 मार्च को नौकरी करनी शुरू की थी। लेकिन तभी लॉकडाउन के चलते काम बंद हो गया। जो रुपये थे वह भी खर्च होने लगे। 14 अप्रैल को दोनों ने पैदल ही घर चलने का निर्णय लिया। राधेश्याम ने बताया कि गुजरात से निकलते समय और मध्य प्रदेश में घुसते समय मेडिकल परीक्षण भी हुआ। फिर सड़क मार्ग छोड़कर जंगल के रास्ते इंदौर पहुंचे। यहां एक रेलवे कर्मी ने 400 रुपये दिए और खाना खिलाया। कानपुर सीमा के जाजमऊ पुल पर पुलिस ने रोक लिया। लेकिन बाद में जाने दिया गया। गांव पहुंचने पर ग्राम प्रधान नरेश त्रिवेदी ने सभी को गांव के बाहर क्वारंटीन कराया है।
चकलवंशी प्रतिनिधि के अनुसार गुजरात के अहमदाबाद से रोडवेज बस से कानपुर पहुंचे श्रमिक हरदोई तक पैदल जाने को मजबूर हैं। वह 157 किलोमीटर की दूरी पैदल तय कर रहे हैं। हरदोई जिले के मोहल्ला प्रताप नगर निवासी चंद्रशेखर, चंदन, जयपाल, सुधीर, रोहित, आकाश, छोटू, ब्रजेश, शिशुपाल, जगतपाल व सूरज गुजरात के अहमदाबाद में एक गुटका फैक्टरी में काम करते थे। लॉकडाउन के बाद कम बंद होने के बाद वहां की सरकार ने सरकारी बस से कानपुर तक भिजवाया। वहां से कोई साधन न मिलने पर 150 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करने निकले। भूखे प्यासे सभी माखी के गांव थाना पहुंचे। यहां बस ने वहीं उतार दिया। उसके बाद अब सभी पैदल जाने को मजबूर हैं।