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एक्सपोर्ट हब के रूप में विकसित होगा जिला

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उन्नाव। जिले के प्रमुख उद्योग लेदर और एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) में शामिल जरी जरदोजी के विदेशों में निर्यात को बढ़ावा देने के लिए जिले को एक्सपोर्ट हब के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए एक समिति का गठन किया गया है। जिसमें अधिकारियों के साथ-साथ उद्यमियों को भी शामिल किया गया है।
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सोमवार को कलक्ट्रेट पन्नालाल सभागार में डीएम देवेंद्र कुमार पांडेय की अध्यक्षता में जिले के लेदर निर्यातकों, उद्यमियों व विभागीय अधिकारियों की बैठक हुई। जिसमें जिले को एक्सपोर्ट हब के रूप में विकसित करने की जानकारी दी गई। बताया गया कि 15 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लालकिले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करने के दौरान देश के 135 जनपदों को पोटेंशियल एक्सपोर्ट हब के रूप में विकसित किए जाने के लिए एक रणनीति बनाने और उसे लागू करने की अपेक्षा की थी। इसके पीछे का उदेदश्य था कि जमीनीस्तर पर कार्यरत सूक्ष्म व लघु इकाईयों का अधिकाधिक विकास हो।
साथ ही उसमें कार्यरत कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाकर निर्यात को प्रोत्साहन दिया जाए। जिससे जनपद, प्रदेश व राष्ट्र के आर्थिक विकास को और सुदृढ़ किया जा सके। इसके बाद डायरेक्टर जनरल आफ फॉरेन ट्रेड (डीजीएफटी) उद्योग मंत्रालय की ओर से निर्यात प्रोत्साहन के लिए प्रदेश स्तर पर प्राथमिकता के आधार पर छह जिलों का चयन किया गया। जिसमें लखनऊ, कानपुर, अलीगढ़, फिरोजाबाद, आगरा के साथ उन्नाव को भी शामिल किया गया।
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एक्सपोर्ट हब में प्रमुख उद्योग लेदर के साथ जरी जरदोजी को शामिल किया गया है। जानकारों के मुताबिक, जिले से हर माह 2 हजार करोड़ का चमड़ा व इससे बने उत्पादों का विदेशी निर्यात होता है। इसके अलावा जिले का जरी जरदोजी भी इसमें शामिल किया गया है। दोनों का निर्यात बढ़ाने के लिए ही एक्सपोर्ट हब विकसित किया जा रहा है। हब विकसित करने के पीछे की मंशा यह है कि निर्यातकों को अपने उत्पाद निर्यात करने में क्या कठिनाइयां आ रही हैं इसकी जानकारी हो सके और समस्याओं को हल करके एक्सपोर्ट को बढ़ाया जाए। इसके लिए डीएम की अध्यक्षता व उपनिदेशक डीजीएफटी की सहअध्यक्षता में 15 सदस्यीय जिलास्तरीय निर्यात प्रोत्साहन समिति का गठन किया गया है। जिसमें विभागीय अधिकारियों के अतिरिक्त उद्यमी हिमांशु तिवारी, नितिन गुप्ता, फैजान उस्मानी, अशरफ रिजवान, अनीस सहगल, एके गर्ग, नियांत गोयल, जाहिरा समेत अन्य को शामिल किया गया है। समिति के सदस्यों से निर्यातकों की अपेक्षाओं के अनुसरा एक निर्यात योजना तैयार करने को कहा गया है।
एक्सपोर्ट हब बनने से जनपद में निर्यात की संभावनाओं को बढ़ावा मिलेगा। इसमें लेदर के साथ-साथ एक जनपद एक उत्पाद योजना के हस्तशिल्पियों को निर्यात के क्षेत्र में शामिल किया जाएगा। सोमवार को हुई बैठक में डीजीएफटी के उपनिदेशक अमित कुमार ने निर्यातकों से उनकी समस्याओं विशेषत: अवस्थापना, लॉजिस्टिक, क्रेडिट सुविधा के संबंध में चर्चा की। उन्होंने निर्यातकों को विशिष्ट क्षेत्र जैसे मार्केटिंग आदि में डेटा उपलब्ध कराने में सहयोग प्रदान करने की बात कही। प्रभारी उपायुक्त रोचना सिंह ने बताया कि निर्यात बढ़ाने के लिए समिति द्वारा जो भी प्रस्ताव दिए जाएंगे उन्हें सीधे संयुक्त आयुक्त एक्सपोर्ट वाणिज्य मंत्रालय को भेज दिया जाएगा।
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