उन्नाव/असोहा। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में शामिल पुरवा-सोहरामऊ से निकला तारनखेड़ा संपर्क मार्ग दो साल बाद भी नहीं बन सका। खस्ताहाल मार्ग से क्षेत्र की एक लाख की आबादी हिचकोले खाते सफर कर रही है। एक्सईएन का कहना है कि संस्था को काम पूरा करने के लिए दिसंबर तक का समय दिया है।
पुरवा-सोहरामऊ मार्ग से मिर्रीखेड़ा, निद्धाखेड़ा, तारनखेड़ा होते हुए उन्नाव-पुरवा मार्ग को जोड़ने वाली 6.3 किलोमीटर लंबी सड़क को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में शामिल किया गया था। इसके निर्माण के लिए 7.54 करोड़ स्वीकृत हुए थे। सड़क का निर्माण कार्य सितंबर 2022 में शुरू होकर सितंबर-2023 में पूरा होना था लेकिन तय समय सीमा से 14 माह बीत जाने के बाद भी काम अधूरा है। इससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस मार्ग से तीन विद्यालयों के बच्चे और मिर्रीखेड़ा, कालीखेड़ा, अच्छीखेड़ा, निद्धाखेड़ा, करौली और तारनखेड़ा की लगभग 50 हजार की आबादी आवागमन करती है।
अनुरक्षण लागत बचाने के लिए निर्माण में कर रहे देरी
सूत्रों की मानें तो सड़क निर्माण में कार्यदायी संस्था मेसर्स ओमप्रकाश चौबे सिद्धार्थनगर की ओर से जानबूझकर लेटलतीफी की जा रही है। इसके पीछे अनुरक्षण कार्य का पैसा बचाना है। सूत्रों का कहा है कि सड़क निर्माण के बाद पांच वर्षों की अनुरक्षण (मरम्मत) लागत 58.12 लाख रुपये है। प्रतिवर्ष लगभग 12 लाख रुपये होते हैं। जानकार बताते हैं कि निर्माण कार्य में जितनी देरी होगी, अनुरक्षण कार्य के लिए उतना कम समय मिलेगा। इसलिए अनुरक्षण धनराशि की बचाने के लिए काम में देरी की जा रही है।
कोट
कार्यदायी संस्था को काम पूरा करने के लिए समय बढ़ा दिया गया है। पहले सितंबर 2023 तक सड़क निर्माण पूरा करना था। अब इसे बढ़ाकर दिसंबर-2024 किया गया है। कार्यदायी संस्था ने बढ़े समय में काम पूरा करने की बात कही है।
- एसके जैन, एक्सईएन प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना
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क्या कहते हैं लोग
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पुरवा के छोटू त्रिवेदी का कहना है कि सड़क निर्माण न होने से आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गड्ढायुक्त सड़क से निकलने में हिचकोले खाने पड़ रहे हैं। स्कूली बच्चे भी परेशान होते हैं।
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वाहन चालक विजय शुक्ला ने कहा कि रोजाना स्कूली वाहन लेकर इसी मार्ग से आते-जाते हैं। एक साल से अधिक समय से इस खस्ताहाल मार्ग पर आवागमन करने से कमर दर्द की शिकायत होने गई है।