कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में तैनात पार्ट टाइम टीचर मानदेय के लिए पांच माह से भटक रहे हैं। जब उनका मानदेय आया तो वह निर्धारित मानक के अनुसार नहीं आया। बुधवार को टीचर डीएम व बीएसए से मिले और अपनी समस्या बताई।
टीचरों का कहना था कि उन्हें अक्टूबर 2014 से अभी तक मानदेय नहीं मिला था। अक्टूबर में मानदेय 7200 रुपये था जबकि बाद में घटाकर पांच हजार कर दिया है। मार्च में जब मानदेय आया है तो वह भी निर्धारित मानदेय नहीं आया है।
किसी के खाते में 75 रुपये तो किसी के खाते में दो हजार रुपये हैं। कुछ ऐसी भी टीचर हैं जो बांगरमऊ से हिलौली विकासखंड में पढ़ाने के लिए जाती हैं इसमें उनका महीने में आने-जाने में किराया ही इससे अधिक लग जाता है। मानदेय पूरा न आने से स्थिति और भी दयनीय होती जा रही है।
बता दें कि कस्तूरबा में पढ़ाने वाले पार्ट टाइम टीचरों के अलावा अन्य स्टाफ का मानदेय बढ़ाया जा चुका है। ऐसे में इन टीचरों का मानदेय न बढ़ने से वह परेशान हैं।
बीएसए डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि पहले इन टीचरों को 7200 रुपये मानदेय मिलता था। बाद में घटाकर पांच हजार किया गया है।
जिन टीचरों के खाते में गलती से पहले का मानदेय भेजा गया था उन्हीं के मानदेय से इस बार रिकवरी की गई है। अगले सत्र में इनके मानदेय पर चर्चा होगी। इस दौरान पार्ट टाइम टीचरों में मोनिका, अनुराधा, संजू, संगीता टीचर मौजूद रहीं।