वहीं प्रतिबंध के बावजूद सपेरे लोगों को नाग के दर्शन व श्र्रंगार कराने के लिए गली व सड़कों में दिखाई दिए। इस दौरान महिलाओं व लड़कियों ने घर के पुराने कपड़ों की गुड़ियॉ बनाई जिन्हे चौराहों पर ले जाकर लड़कों ने डंडो से पिटाई कर परंपरा निभाई।
नागपंचमी पर्व के चलते सुबह से ही नगर स्थित दुर्गा मंदिर समेत सभी मंदिरों में नागदेवता के पूजन के लिए भक्तों का तांता लगा रहा। इस दिन अधिकांश लोगों ने अपने घर की दहलीज के दोनों ओर गोबर, कोयला, हल्दी आदि से पांच सिर वाले नाग की आकृति बनाई इसके बाद नाग देवता को दूध, दुर्वा, कुश, गंध, फूल, अक्षत, लड्डुओं सहित पूजा करके नाग स्त्रोत या मंत्र का जाप किया। नाग देवता को चंदन की सुगंध विशेष प्रिय होती है इसलिए पूजा में चंदन का प्रयोग किया गया। आनंद घाट के पुरोहित राजू तिवारी ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति पूरे वर्ष नाग की पूजा नहीं कर पाता है तो उसे नागपंचमी के दिन नाग की पूजा करनी चाहिए जिससे उसे सुख-समृद्धि के साथ ही अकाल मृत्यु का भय भी समाप्त हो जाता है। वहीं लोगों ने इस पर्व के दौरान नगर के घाटों पर गंगा स्नान भी किया और घरों में घुघरी, सूतफे नी, चना सहित अन्य प्रकार के व्यंजन बनाएं गए। देर शाम लड़कियों ने बनाई कपड़ें की गुड़ियों की लड़कों ने परंपरा के अनुसार उनकी पिटाई की और भोग स्वरूप घुघरी व चना चढ़ाया।
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इनसेट-
अखाड़े में दंगल का आयोजन
मिश्रा कालोनी स्थित श्रीराम अखाड़े में नागपंचमी के अवसर पर दंगल का आयोजन किया गया जिसमें नगर के पहलवानों के अलावा दूर दराज से आए पहलवानों ने भी जोर आजमाईश की। नन्हें पहलवानों ने भी जोर आजमाइस कर कुश्ती का मजा लिया। कुश्ती करने वालों में दिनेश पहलवान ,बब्लू पहलवान, दिनेश, बंटी, रामजी पांडेय, बजरंगी, हेमराजल पहलवान सहित अन्य कई मौजूद रहे।
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पतंगबाजी का लिया लुत्फ
नाग पंचमी के दिन बच्चों और युवाओं ने पतंगबाजी का भी खूब लुत्फ उठाया। नगर के रामकली स्टेडियम में पतंगबाजों का जमघट लगा रहा जो देर शाम तक पतंगबाजी करतें रहें। इसी तरह से गंगा कटरी में भी युवाओं की भीड़ पतंगबाजी करती देखी गई।
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