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प्रदूषण बढ़ा रहीं ग्लू की भट्ठियां

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दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र में जहरीला धुआं उगलती ग्लू भट्ठी। - फोटो : UNNAO
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उन्नाव। दही चौकी स्थित औद्योगिक क्षेत्र में खुले आम चल रहीं ग्लू भट्ठियां वातावरण में जहर घोल रही हैं। चमड़े की कतरन जलाने के साथ ही यहां चमड़े को गलाया भी जा रहा है। यह सारा खेल जैविक खाद के नाम पर हो रहा है। सब कुछ जानते हुए भी प्रदूषण विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा। यह हाल तब है जब एनजीटी ने हर हाल में ग्लू भट्ठियों को बंद कराने के निर्देश दे रखे हैं।
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दही चौकी क्षेत्र में 20 से अधिक ग्लू भट्ठियां धधक रही हैं। भट्ठियों में छोटी चिमनी का प्रयोग किया जा रहा है। चिमनी से निकलने वाला काला धुआं वातावरण को प्रदूषित कर रहा है। इलाकाई लोगों के अलावा पशु भी बीमार हो रहे हैं। वहीं, भट्ठी संचालक अवशेष को खुले स्थान पर फेंककर जल व जमीन को भी प्रदूषित कर रहे हैं। ग्लू भट्ठियों में चर्म इकाइयों से निकलने वाले चमड़े को गलाया जा रहा है। भट्ठियों को चलाने के लिए चमड़े की कतरन जलाई जा रही है। एक वर्ष में प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से एक भी ग्लू भट्ठी का औचक निरीक्षण नहीं किया गया।
जैविक खाद बनाने के नाम पर चल रहा खेल
ग्लू भट्ठी बनाने वाले अपनी गर्दन बचाने के लिए चमड़े की छीलन से जैविक खाद बनाने की बात कहते हैं। इसके लिए वह प्रदूषण विभाग से एनओसी लेने की बात भी कहते हैं। हालांकि यह सरासर झूठी है। जैविक खाद के नाम पर एनओसी लेने वाले ही खुले तौर पर चमड़े की कतरन जला रहे हैं और चमड़े को गलाते हैं।
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ग्लू भट्ठी पर सख्ती के दिए गए थे निर्देश
एनजीटी की ओर से गठित अनुश्रवण समिति के अध्यक्ष जस्टिस एके टंडन ने प्रदूषण विभाग के अधिकारियों व चर्म इकाई संचालकों को निर्देश दिए थे कि क्षेत्र में एक भी ग्लू भट्ठी न चलने पाए। उन्होंने टेनरी संचालकों को भी निर्देश दिया था कि वह चमड़े के अवशेष सिर्फ उन्हीं को दें जिनके पास प्रदूषण विभाग की अनुमति हो।
निरीक्षण कर करेंगे कार्रवाई
क्षेत्रीय प्रदूषण बोर्ड अधिकारी विमल कुमार ने बताया कि चमड़ा गलाने का काम नहीं हो रहा है। अगर कोई ऐसा कर रहा है तो नोटिस दी जाएगी। औद्योगिक क्षेत्र में सिर्फ दो फैक्टरियों में ही जैविक खाद बनाने की अनुमति दी गई है।
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