गंजमुरादाबाद। बांगरमऊ नगर में तहसील तो स्थापित हो चुकी है लेकिन मुंसिफ कोर्ट के अभाव में वादकारियों को न्याय के लिए करीब 50 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ रही है।
इसी दौड़ को खत्म करने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता फारुक अहमद ने 17 अक्तूबर 2016 को हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में तहसील स्तर पर मुंसिफ कोर्ट जूनियर डिवीजन स्थापित कराने के लिए जनहित याचिका दाखिल की थी। अदालत ने 4 नवंबर 2016 को याचिका निस्तारित करते हुए प्रदेश सरकार को मुंसिफ कोर्ट के लिए मूलभूत सुविधाएं तत्काल मुहैया कराने का कड़ा निर्देश दिया था। हालांकि अदालती निर्देशों के बावजूद प्रदेश सरकार ने कोर्ट स्थापित करने के संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की। इस पर अधिवक्ता ने प्रदेश सरकार के खिलाफ 19 दिसंबर 2017 को अदालत में अवमानना याचिका दाखिल कर दी। जिसकी सुनवाई करते हुए अदालत ने प्रदेश के प्रमुख सचिव विधि एवं न्याय उमेश कुमार को नोटिस भेजकर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। नोटिस मिलते ही प्रमुख सचिव ने जिलाधिकारी को मुंसिफ कोर्ट की स्थापना के लिए 20 एकड़ भूमि जल्द उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
तत्कालीन एसडीएम ने 3 नवंबर 2018 को ही क्षेत्र के राजस्व ग्राम इस्माइलपुर आंबापारा, जोगीकोट तथा कबीरपुर की 32 बीघे की संयुक्त भूमि का प्रस्ताव शासन को भेज दिया। उधर, विधि और न्याय मंत्रालय ने भी मुंसिफ कोर्ट की स्थापना के लिए एक पद सिविल जज जूनियर डिवीजन, एक पद स्टेनोग्राफ र, 2 पद वरिष्ठ लिपिक, 2 पद कनिष्ठ लिपिक, एक चपरासी तथा एक अर्दली समेत 9 पद सृजित भी कर दिए। फि र भी यहां की तहसील में न्यायालय की स्थापना नहीं हो सकी। अब हाईकोर्ट आगामी 15 नवंबर को इस मामले में सुनवाई करेगा। इसकी सूचना मिलते ही गुरुवार को जनपद न्यायाधीश और मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने यहां की तहसील का दौरा किया। दोनों न्यायिक अधिकारियों ने अस्थाई मुंसिफ कोर्ट की स्थापना के लिए नगर स्थित शहीद जसा सिंह भवन और पुराने सरकारी अस्पताल के भवन का निरीक्षण किया। दोनों भवनों में शौचालय व पेयजल सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं का जायजा लिया। न्यायिक अधिकारियों के अनुसार, स्थायी भवन निर्मित होने तक अस्थाई तौर पर न्यायालय की स्थापना जल्द ही किसी सरकारी भवन में कर दी जाएगी।