श्रीमद्भागवत कथा सुनाते देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज। संवाद
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उन्नाव। भगवताचार्य देवकी नंदन ठाकुर ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने साथ-साथ दूसरों के बारे में भी सोचना चाहिए। मनुष्य जब अभिमान करता है तो वह दुखी होता है। हमारे दुखों का कारण अहंकार है। व्यक्ति जब अहंकार की सीढ़ी चढ़ जाता है तो उसे भला-बुरा और अपना-पराया नहीं दिखता। इसका सबसे अच्छा मार्ग है ईश्वर की भक्ति। भक्ति करने वाला अहंकारी नहीं हो सकता।
शेखपुर-करोवन मोड़ मैदान में चल रही भागवत कथा के छठवें दिन देवकी नंदर ने कृष्ण- रुक्मिणी विवाह और श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया। बताया कि बिना साधना के भगवान का सानिध्य नहीं मिलता। द्वापर युग में गोपियों को भगवान श्रीकृष्ण का सानिध्य इसलिए मिला, क्योंकि वह त्रेता युग में ऋषि-मुनि के जन्म में भगवान के सानिध्य की इच्छा को लेकर कठोर साधना की थी। शुद्ध भाव से की गई परमात्मा की भक्ति सभी सिद्धियों को देने वाली है। शुकदेव जी महाराज, परीक्षित से कहते हैं कि जो भागवत कथा को सुनता है उसे भगवान के रसमय स्वरूप का दर्शन होता है। उसमें श्याम के प्रति प्रेम जाग्रत होता है। श्रीरामलीला कमेटी के पदाधिकारियों में राम तनेजा, अजीत पाल सिंह, राकेश सिंह ने भगतवताचार्य का सम्मान किया और राम दरबार भेंट किया।
परियर। कथावाचक देवकीनंदन ठाकुरजी महाराज ने महर्षि बाल्मीकि की तपोस्थली व लवकुश की जन्मस्थली जानकीकुंड पहुंच कर माता जानकी के दर्शन किए। बाबा बलखंडेश्वर मंदिर में शिवलिंग पर जलाभिषेक किया।
उन्होंने कहा कि जिस रामायण में हम भगवान श्रीराम के जीवन को सुनते हैं। उस जिले से भगवान श्रीराम का नाता है और यहां आने का उन्हें सौभाग्य मिला। उन्होंने आश्रम के वटवृक्ष के नीचे एक बार कथा करने की इच्छा जाहिर की। सदर विधायक पंकज गुप्ता, जिला पंचायत सदस्य अरुण सिंह, सुरेश वर्मा, दिनेश, पंडित रमाकांत त्रिपाठी, बड़कऊ दीक्षित व हरिनारायण पांडेय मौजूद रहे।