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गर्भवती की मौत पर नर्सिंगहोम में हंगामा

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नर्सिंगहोम के बाहर हंगामा करते मृतका के परिजन। संवाद - फोटो : UNNAO
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नवाबगंज। अजगैन कस्बा स्थित नर्सिंगहोम में गर्भवती की मौत हो गई। गुस्साए परिजनों ने हंगामा किया। बवाल बढ़ते देख नर्सिंगहोम संचालक और स्टॉफ भाग निकला। पुलिस ने परिजनों को शांत कराया और शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा। मृतका के पति ने नर्सिंगहोम संचालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
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गांव सुबेदारखेड़ा निवासी बरातीलाल लोधी की नौ माह की गर्भवती पत्नी रामावती को प्रसव पीड़ा होने पर मंगलवार रात परिजन असोहा सीएचसी लेकर पहुंचे। महिला डॉक्टर ने हालत गंभीर बता जिला अस्पताल रेफर कर दिया। परिजन रामावती को जिला अस्पताल लेकर जा रहे थे। तभी एक व्यक्ति मिला और बेहतर इलाज की बात कही। परिजनों के साथ गर्भवती को अजगैन के पास स्थित माही अस्पताल नाम के नर्सिंगहोम लेकर पहुंचा। पति बराती लाल के मुताबिक नर्सिंगहोम में सबसे पहले 39 हजार रुपये जमा कराए गए। इसमें जांच के नाम पर तीन हजार, ऑपरेशन के लिए 18 हजार, दो यूनिट खून के दो हजार, खून चढ़ाने के नाम पर 12 हजार व अन्य खर्चों में चार हजार रुपये शामिल थे। पति के अनुसार रामावती को भर्ती करने के बाद मिलने नहीं दिया गया।
बुधवार सुबह स्टाफ ने रामावती और गर्भ में बच्चे की मौत होने की जानकारी दी। इससे नाराज परिजनों ने हंगामा शुरू किया। आधे घंटे बाद पुलिस पहुंची और परिजनों को शांत कराया। मृतका के पति बरातीलाल की तहरीर पर पुलिस ने नर्सिंगहोम संचालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यूट्रस फटने से महिला व उसके गर्भस्थ शिशु की मौत की पुष्टि हुई है। बिसरा भी सुरक्षित किया गया है। रामावती के दो बेटियां पायल और काजल हैं। पति मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करता है।
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सीएमओ डॉ. सत्यप्रकाश ने बताया कि मामला जानकारी में आया है। जांच के लिए सीएचसी प्रभारी को भेज जांच कराई गई है। रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
सीएमओ के आदेश पर नर्सिंगहोम जांच करने पहुंचे नवाबगंज सीएचसी प्रभारी डॉ. अरुण कुमार को नर्सिंगहोम के मेडिकल स्टोर में एक्सपायरी दवाएं मिलीं। पैरामेडिकल स्टॉफ व कोई डॉक्टर नहीं था। कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था नहीं थी। रिकार्ड भी दुरुस्त नहीं मिले। उनके साथ डॉ राजेश व बीसीपीएम प्रशांत दीक्षित मौजूद रहे।
इसी नर्सिंगहोम में 25 जुलाई 2020 को सधीरा गांव निवासी दीपक सिंह की पत्नी के प्रसव के बाद नवजात की मौत हो गई थी। बिना महिला डॉक्टर के ही प्रसव करा दिया गया था। तत्कालीन एसीएमओ डॉ. तन्मय कक्कड़ ने इसकी जांच की थी। जांच में प्रसव कराने वाले डॉ. इफ्तिहार अली की लापरवाही सामने आई थी। उन्होंने डॉक्टर की डिग्री निरस्त कराने के लिए एमसीआई (मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया) को रिपोर्ट भेजी थी। तब से सीएमओ की ओर से तीन बार रिमाइंडर भेजा जा चुका है। अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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