उन्नाव। पुरवा कोतवाली के मिर्जापुर सुम्हारी में नौ साल पहले दहेज की मांग पूरी न होने पर युवती की हत्या में अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या छह के न्यायाधीश ने पति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दो जेठ, जेठानी, देवर व देवरानी को सात साल की सजा सुनाई है। हर दोषी पर पांच हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माने की धनराशि का 50 प्रतिशत वादी मुकदमा को मिलेगा।
असोहा थानाक्षेत्र के गांव पाठकपुर निवासी रामावती की शादी 2009 में पुरवा कोतवाली के गांव मिर्जापुर सुम्हारी राम आसरे के बेटे देवराज से हुई थी। शादी के बाद एक बेटी हुई। दहेज में बाइक की मांग पूरी न होने पर ससुरालीजन उसे पीटते थे। कई बार मायके पक्ष के लोगों ने आकर समझौता कराया। 13 नवंबर 2013 को ससुरलीजनों ने गर्भवती रामावती को पीटा और बाद में मारकर रस्सी के फं दे पर लटका दिया था। पति की सूचना पर मृतका का भाई रामशंकर बहन की ससुराल पहुंचा तो शव फंदे से लटक रहा था। भाई की तहरीर पर पुलिस ने पति देवराज, ससुर रामआसरे, सास फूलदुलारी, जेठानी प्रकाशवती, जेठ धीरेंद्र, देवेंद, देवर सुरेंद्र कुमार व देवरानी आरती के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवेचना के बाद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की थी। इसी बीच सास व ससुर की मौत हो गई। मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या छह के न्यायाधीश अलोक शर्मा कर रहे थे। वरिष्ठ अधिवक्ता रामदत्त सिंह व शासकीय अधिवक्ता यशवंत सिंह की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने सजा सुनाई।