उत्तर प्रदेश मनरेगा कार्मिक कल्याण संगठन के बैनर तले मनरेगा संविदा कर्मियों ने मुख्यमंत्री का ज्ञापन भेजकर अधिकार दिए जाने की मांग की है।
ज्ञापन में बताया कि वर्ष 2007 से आज तक नौ साल बीत चुके हैं, लेकिन इसके बाद भी वेतन निर्धारण और सेवा नियमावली का निर्धारण नहीं किया गया है। इससे उन लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
मनरेगा में कार्यरत श्रमिकों को 15 दिन में भुगतान का प्रावधान है, लेकिन योजना का क्रियान्वयन कराने वाले कार्मिकों को नौ माह से अधिक समय बावजूद मानदेय नहीं दिया जाता है।
ज्ञापन में कहा है कि जल्द ही उनकी वेतन विसंगतियों को दूर नहीं किया गया और सेवा नियमावली का निर्धारण नहीं हुआ तो वह लोग सात फरवरी से योजना संचालन से विरत रहकर आंदोलन करने को बाध्य होंगे।