नगर पंचायत भगवंतनगर के पिंक शौचालय में मार्कर से लिखा गया 2018। संवाद
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पाटन। नगर पंचायत भगवंतनगर में पिंक शौचालय में निर्माण वर्ष बदलकर ‘खेल’ करने के मंसूबों पर पानी फिर गया। अमर उजाला के खुलासे पर बुधवार को आनन-फानन फिर निर्माण वर्ष बदलकर 2021 की जगह 2018 कर दिया गया। जिम्मेदारों ने किसी गोलमाल की मंशा से इनकार करते हुए निर्माण वर्ष बदलने का ठीकरा सर्वेक्षण टीम पर फोड़ा है।
महिलाओं को शौचालय की सुविधा देने के लिए भगवंतनगर नगर पंचायत प्रशासन ने वर्ष 2018 में कस्बे के वार्ड नौ में कन्या जूनियर हाईस्कूल विद्यालय के पास पिंक शौचालय का निर्माण कराया गया था। इसकी लागत साढ़े सात लाख रुपये आई थी। निर्माण के बाद से इस सामुदायिक पिंक शौचालय में नगर पंचायत ने अपना ताला डाल रखा था। प्रयोग न होने से इमारत के अंदर लगी शीट, टाइल्स व दीवारें आज भी नई स्थिति में हैं। इसी बीच शौचालय के निर्माण वर्ष में परिवर्तन कर 2021 कर दिया गया। सभासद व कस्बेवासियों ने इस पिंक शौचालय का दोबारा भुगतान कराने का प्रयास करने की आशंका जताई थी। अमर उजाला द्वारा बुधवार के अंक में पूरा मामला प्रकाशित होने पर हड़कंप मच गया। नगर पंचायत प्रशासन ने मार्कर पेन से ही पुन: निर्माण वर्ष 2018 करा दिया। ईओ राजाराम ने किसी भी प्रकार के दोबारा भुगतान व खेल से इंकार किया। उन्होंने निर्माण वर्ष बदलने का ठीकरा सर्वेक्षण टीम पर फोड़ा। स्टाफ से ली गई जानकारी का हवाला देते हुए ईओ ने बताया कि उनकी तैनाती से पहले सर्वेक्षण के लिए आई टीम ने निर्माण वर्ष बदल दिया था। उन्होंने निर्माण वर्ष बदलने को गलत बताया और जांच कराने की बात कही।
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नगर पंचायत ईओ द्वारा दिया जा रहा तर्क कस्बेवासियों के गले नहीं उतर रहा है। कस्बे के लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि महीनों पूर्व सर्वेक्षण टीम ने ही निर्माण वर्ष परिवर्तन किया था तो नगर पंचायत ने इस पर आपत्ति क्यों नहीं की। नगर पंचायत कर्मियों को साथ लिए बिना सर्वेक्षण टीम ने यदि बदलाव किया था तो इतने दिनों तक उसे ठीक क्यों नहीं किया। इसके अलावा वर्ष 2018 से अब तक पिंक शौचालय में ताला बंद रखने के सवाल का जवाब अब भी नगर पंचायत के पास नहीं है।