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गाजर के दाम गिरे औंधे मुंह

Fri, 05 Feb 2016 01:08 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, उन्नाव
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ब्लाक सिकंदरपुर सरोसी व सफीपुर क्षेत्र में गाजर के दाम औंधे मुंह गिर गए हैं। दाम कम होने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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किसान गाजर मंडी ले जाते हैं तो उन्हें लागत निकालने के लाले पड़ रहे हैं, यहां तक कि उनका भाड़ा भी नहीं निकल पा रहा है। उचित मूल्य न मिलने से किसान भुखमरी के कगार पर पहुंच रहे हैं। इससे आजिज आकर गुरुवार को दर्जनों किसानों ने गाजर की फसल खोदकर सड़क पर फेंक दी।


ब्लाक सिकंदरपुर सरोसी के गांव उमरायखेड़ा, बरहली, बिलारीगोझा, कंजौरा, मोमिनपुर, मुबारकपुर, करवासा, नयाखेड़ा व सफीपुर क्षेत्र के पावा, रायपुर, ढकिया, मुस्तफाबाद, खोखापुर, हसनापुर आदि दर्जनों गांवों में गाजर की खेती बड़े पैमाने पर होती है।
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उमरायखेड़ा के मुकेश, पप्पू, संतोष, जगतपाल, मुल्ला, मेवालाल आदि दर्जनों गाजर किसानों ने बताया कि गाजर की फसल में एक बीघा खेत में हजारों रुपये की लागत आती है।


पहले खेत की जुताई, गुड़ाई, पंपिंग सेट से सिंचाई में हजारों रुपये लगते हैं, फिर एक बीघा खेत में दो किलोग्राम बीज एक हजार रुपये, डीएपी 50 किलोग्राम 1150 रुपये, पोटास की कीमत 1100  रुपये, जिंक 350 रुपये और तैयार गाजर की धुलाई में 20 रुपये प्रति बोरा का खर्च आता है।


इसके बाद इसे मंडी तक पहुंचने में 40 रुपये प्रति बोरा भाड़ा लगता है। मौजूदा समय में मंडी में इसके दाम गिरने से लागत तक नहीं निकल रही है।

 
लखनऊ मंडी के आढ़ती हीरालाल ने बताया कि गाजर के खरीददार कम होने से दाम में कमी आई है। बताया कि इस समय गाजर थोक मंडी में तीन से पांच रुपये किलो बिक रही है। एक बोरे में एक क्विंटल गाजर आती है, जिससे इस समय एक बोरा 300 रुपये का होता है।
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मजदूरी लगाकर पूरा दिन गाजर की खुदाई की जाती है। फिर धुलाई, बोरे में भराई और मंडी ले जाने के लिए भाड़ा, जो 500 रुपये का खर्च आ जाता है।

 
सफीपुर क्षेत्र के पावा गांव निवासी पुत्ती, राघवेंद्र, प्रसादी, विजयपाल आदि किसानों ने गाजर की लागत न निकलने से कई बोरा गाजर सड़क किनारे फेंक दी।



किसानों ने सरकार के प्रति आक्रोश जताते हुए कहा कि किसानों के प्रति शासन के वादे खोखले निकल रहे हैं। धरातल पर किसान कभी दैवी आपदा से तो कभी खाद, बीज, मजदूरों की महंगाई से जूझ रहा है। अब तो गाजर के गिरे दामों से किसानों की कमर ही टूट गई है।
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