असोहा कांड के आरोपी को न्यायालय पेशी पर लेकर जाती पुलिस।
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उन्नाव। असोहा थाना क्षेत्र में दो किशोरियों की हत्या और एक के हत्या के प्रयास की वारदात में पुलिस की जल्दबाजी ने विभाग की खूब किरकिरी कराई थी। रिपोर्ट दर्ज करने के दौरान एक किशोरी के जीवित होते हुए पुलिस ने हत्या व साक्ष्य छिपाने की धारा दर्ज कर तीनों किशोरियों को लिखा-पढ़ी में मार डाला था।
हत्या के प्रयास की धारा बढ़ाने के लिए विवेचक ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था। शुक्रवार को पहली पेशी के दौरान न्यायालय में आरोपियों को हाजिर किया गया। न्यायाधीश ने पुलिस के प्रार्थनापत्र पर हत्या के प्रयास की धारा (307) बढ़ाने की अनुमति दे दी। पुलिस ने आरोपियों पर यह धारा भी बढ़ा दी है।
एक गांव में 17 फरवरी को दो किशोरियों को पानी में जहर देकर मार डाला गया था। तीसरी किशोरी को गंभीर हालत में कानपुर के रीजेंसी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 18 फरवरी को असोहा थाना पुलिस ने एक किशोरी के जीवित होते हुए हत्या व शव छिपाने की धारा में रिपोर्ट दर्ज कर दी थी।
22 मार्च को अमर उजाला ने पुलिस की इस खामी को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इस पर पुलिस ने तीनों को जहर देकर मारने की धारा (328) की बढ़ोत्तरी तो की पर हत्या के प्रयास की धारा नहीं लगाई। मामला चर्चा में आया तो पुलिस ने गलती सुधारने के प्रयास शुरू किए।
पुलिस ने हत्या के प्रयास की धारा बढ़ाने के लिए न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया था। शुक्रवार को जिला कारागार से दोनों आरोपियों को न्यायालय पेशी पर लाया गया। सुनवाई के दौरान न्यायालय की ओर से पुलिस को हत्या के प्रयास की धाराएं बढ़ाने की अनुमति दी गई। विवेचक ओमप्रकाश रजक ने बताया कि कोर्ट से आदेश प्राप्त कर हत्या के प्रयास की धारा बढ़ाई गई है। 18 मार्च को आरोपियों की अगली पेशी होगी।
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पांच दिन पहले जेल में शिफ्ट
कोराना गाइडलाइन के अनुपालन में गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपियों को जिला जेल की जगह अस्थायी जेल बक्खाखेड़ा भेजा था। आरटीपीसीआर रिपोर्ट में दोनों के निगेटिव होने पर 28 फरवरी को अस्थायी जेल से जिला जेल भेजा गया था। सह आरोपी की उम्र में फंसे पेंच को देखते हुए उसे किशोर बैरक और मुख्य आरोपी विनय को अन्य आरोपियों के साथ रखा गया था।