उन्नाव। जेल में निरुद्ध हिस्ट्रीशीटर अंशू गुप्ता की जमानत याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई। इस दौरान आरोपी के अधिवक्ता ने जमानत याचिका स्वीकृत करने को लेकर अपना पक्ष रखा। अभियोजन पक्ष से जिला शासकीय अधिवक्ता ने मामले में पैरवी की। दोनों पक्षों को सुनने के बाद जिला जज ने आरोपी को दूसरे मुकदमे में एक, एक लाख के दो बंध पत्र पर सशर्त जमानत दे दी।
सदर कोतवाली पुलिस ने 26 मई को विशंभर प्रसाद की तहरीर पर अंशू गुप्ता व उसके साथियों पर रंगदारी मांगने व गलत तरीके से भूमि का बैनामा कराने समेत अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की थी। इस मामले में जमानत के लिए अंशू के अधिवक्ता ने सीजेएम न्यायालय में याचिका दायर की थी। जिसे न्यायाधीश ने खारिज कर दिया था। इसके बाद अंशू के अधिवक्ता ने 21 जून को जिला जज के न्यायालय में दोबारा जमानत याचिका डाली थी। 26 जून को हुई सुनवाई के दौरान आरोपी के अधिवक्ता ने कानपुर हैलट अस्पताल में कराई गई नेत्र जांच रिपोर्ट को जिला जेल से तलब कराने को कहा था। इस पर जिला जज की न्यायालय में चार जुलाई को दोबारा सुनवाई हुई थी। इस दौरान लखनऊ नेत्र चिकित्सालय की रिपोर्ट न्यायालय में पेश नहीं हो सकी थी। जिला जज ने अगली सुनवाई के लिए नौ जुलाई की तारीख नियत की थी। इस दिन सुनवाई के दौरान आरोपी के अधिवक्ता द्वारा पेश किए गए हलफनामे में तारीख अंकित न होने पर 16 जुलाई को दोबारा सुनवाई करने का आदेश दिया गया। बुधवार को सुनवाई के दौरान आरोपी के अधिवक्ता ने अपना पक्ष रखने के लिए जिला जज से समय मांगा था। जिसके बाद जिला जज ने आज सुनवाई के निर्देश दिए थे। गुरुवार को सुनवाई के दौरान जिला जज वाणी रंजन अग्रवाल ने अंशू गुप्ता को दूसरे मुकदमे में भी जमानत दी है।