उन्नाव। जिले के अनरजिस्टर्ड नर्सिंग होम में खुले मेडिकल स्टोर भी स्वास्थ्य विभाग में रजिस्टर्ड नहीं है। नर्सिंग होम संचालक बिना लाइसेंस चल रहे मेडिकल स्टोर से मरीजों को दवाएं बांट रहे हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे मेडिकल स्टोर्स की ओर से आंख मूंदे हुए है।
शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में 51 ऐसे नर्सिंग होम हैं जो स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड में दर्ज हैं। वहीं इससे कहीं अधिक नर्सिंग होम बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे हैं। इन नर्सिंग होम में मरीजों को दवाएं उपलब्ध कराने के लिए उनके मेडिकल स्टोर भी खुले हुए है। ये मेडिकल स्टोर्स भी नर्सिंग होम की तरह ही अवैध हैं। नर्सिंग होम में मेडिकल स्टोर खोलने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से लाइसेंस जारी किया जाता है। लेकिन इसे लेना नर्सिंग होम संचालक मुनासिब नहीं समझते। नर्सिंग होम संचालक बिना स्वास्थ्य विभाग की अनुमति के ही मेडिकल स्टोर चला रहे हैं। नियमत: नर्सिंग होम में मेडिकल स्टोर खोलने के लिए वही प्रक्रिया अपनाई जाती है जो बाहर कहीं भी मेडिकल स्टोर खोलने के लिए होती है। इसके बाद भी नर्सिंग होम संचालक मेडिकल स्टोर के लिए लाइसेंस लेना मुनासिब नहीं समझते। वहीं स्वास्थ्य विभाग भी अनरजिस्टर्ड मेडिकल स्टोर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करना चाहता है। नर्सिंग होम में खुले मेडिकल स्टोर्स से मरीजों को मार्केट रेट से कई गुना महंगी दवाएं दी जाती हैं। इसके साथ मरीजों के पर्चे पर सिर्फ वही दवाएं लिखी जाती हैं जो नर्सिंग होम के मेडिकल स्टोर पर ही उपलब्ध रहती हैं। सूत्रों की माने तो नर्सिंग होम के मेडिकल स्टोर में मिलने वाली दवा मार्केट रेट से तीन से चार गुना अधिक महंगी होती है। नर्सिंग होम के डॉक्टर मरीजों को बाहर के मेडिकल स्टोर की दवा का प्रयोग नहीं करने देते हैं। नर्सिंग होम के मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने के बजाय अगर कोई तीमारदार बाहर के मेडिकल स्टोर से दवा खरीदकर नर्सिंग होम पहुंच जाता है तो उसे वह दवा वापस करने को कह दिया जाता है।