टीवी चैनलों पर बच्चों के मनोरंजन के लिए प्रसारित होने वाले विभिन्न कार्टून कार्यक्रमों पर इस्लामी कायदे कानून भारी पड़ रहे हैं।
पाकिस्तान से कार्टून देखने को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में दारुल उलूम के मुफ्तियों ने साफ कहा कि चूंकि कार्टून जीवित छवि होती है इसलिए इसे देखना नाजायज है।
कार्टून नेटवर्क और पोगो चैनल पर प्रसारित होने वाले टॉम एंड जेरी, डोरेमौन, बेन टेन और छोटा भीम आदि कार्टून शो बच्चों के चेहते बने हुए हैं।
बच्चों की दीवानगी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अपने चेहते कार्टून शो को देखने के लिए बच्चे अकसर बड़ों के पसंदीदा कार्यक्रमों का भी विरोध कर देते हैं।
कार्टून देखने को लेकर आठ जुलाई को पाकिस्तान से ऑनलाइन सवाल संख्या 46,871 में दारुल उलूम के मुफ्तियों से पूछा गया कि क्या आम मजाकिया (हास्य) कार्टून देखना पाप है या नहीं?
मुफ्तियों ने 21 अगस्त को जवाब संख्या एन=10/1434/1117-1218 में शरीयत का हवाला देते हुए कहा कि कार्टून चूंकि जीवित छवि होती है इसलिए यह देखना सही नहीं होगा चाहे वह आम हास्य कार्टून ही क्यों न हों।
मुफ्तियों ने कराची पाकिस्तान की एक पुस्तक का हवाला देते हुए कहा कि पुस्तक में कहा गया है कि जो तस्वीरें बनाना और घर में रखना नाजायज है उनका देखना भी अवैध है।
दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ मुफ्ती आरिफ कासमी ने कहा कि कार्टून क्योंकि पिक्चर होती है और उसे देखने से लाभ कम और बच्चों को नुकसान अधिक होता है वह नाजायज है।
मदरसा जामिया इमाम मोहम्मद अनवर शाह के वरिष्ठ मुफ्ती अरशद फारुखी ने कहा कि दारुल उलूम से जो फतवा आया है वह सही है। उधर, इस्लामिक एकेडमी ने तालीमी मकासिद (जिनसे बच्चों का ज्ञान बढ़ता है) के लिए कार्टून शो देखने को जायज ठहराया।