प्रतापगढ़ जिले के बलीपुर गांव में क्षेत्राधिकारी जिया उल हक की हत्या का मकसद क्या था, इसे लेकर कई तरह की बातें कही जा रही हैं।
पुलिस ने इस मामले में जिया उल हक की पत्नी परवीन आजाद की तहरीर पर राजा भैया सहित चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। लेकिन दो आरोपियों की गिरफ्तारी को छोड़ अब तक कोई सफलता हासिल नहीं की जा सकी है।
राज्य सरकार ने मामले की सीबीआई से जांच कराने की घोषणा की है।
वहीं, क्षेत्राधिकारी की हत्या को कुछ मानवाधिकार संगठन इसे पिछले वर्ष अस्थान में हुई सांप्रदायिक हिंसा से जोड़ कर देख रहे हैं। हक की हत्या के पीछे खनन माफियाओं के खिलाफ जारी उनकी मुहिम और ईमानदारी को भी वजह बताया जा रहा है।
कारण्ा 1: अस्थान दंगों की कर रहे थे जांच
डीएसपी जिया उल हक को पिछले वर्ष कुंडा के अस्थान इलाके में हुए दंगे के बाद वहां का क्षेत्राधिकारी बनाया गया था। दंगे में अल्पसंख्यकों के 40 मकान जला दिए गए थे। वे इस मामले की जांच कर रहे थे।
जांच में राजा भैया के करीबियों का नाम आ रहा था। उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट तैयार कर ली थी। उन्हें यह रिपोर्ट 12 मार्च को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच को सौंपनी थी।
उन पर जांच रिपोर्ट को बदलने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। हालांकि उन्होंने दबंगों के सामने झुकने से इनकार कर दिया था।
कारण्ा 2: खनन माफियाओं के निशाने पर भी थे
जिया उल हक कुंडा क्षेत्र के खनन माफियाओं के निशाने पर भी थे। नियुक्ति के बाद से ही वे रेत और पत्थर के अवैध कारोबार पर लगाम लगाने की कोशिश कर रहे थे।
क्षेत्र के अवैध खनन कारोबारियों के खिलाफ भी उन्होंने जांच रिपोर्ट तैयार की थी। रिपोर्ट में 140 अवैध कारोबारियों का नाम आ रहा था। इनमें से अधिकांश राजा भैया के करीबी थे। हक पर इस जांच को रोकने का भी दबाव था।
कारण्ा 3: पत्नी से कहा था, पैरवी होती तो छोड़ देता कुंडा
जिया उल हक की पत्नी परवीन आजाद ने बताया कि वे पिछले 15 दिनों से काफी परेशान थे। हक ने परवीन से फोन पर हुई बातचीत में कहा था, 'अगर मेरे पास भी ऊंचे लेवल की पैरवी होती तो मैं कुंडा से अपना ट्रांसफर करा लेता।
कुंडा में रहते हुए जिया उल हक ने राजा भैया और उनके आदमियों से हमेशा दूरी बनाकर रखी। वे लगातार इनके खिलाफ शिकंजा कस रहे थे। ये बाते राज भैया के आदमियों को तनिक भी रास नहीं आ रही थीं।
संभावना है कि जिया उल हक की हत्या के पीछे ये वजहें हो सकती हैं।