लखनऊ विश्वविद्यालय की हालत किसी से छिपी नहीं है। यहां दाखिले की आस में विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार मानकों को गिराकर लाज बचाने की कोशिश में लगा हुआ है। बावजूद इसके, राजधानी के निजी उच्च शिक्षा संस्थानों और छात्रों का मोह एमबीए कोर्सेज से लगातार भंग होता जा रहा है।
एमबीए से बना रहे दूरी
अब गौतम बुद्ध प्राविधिक विश्वविद्यालय (जीबीटीयू) से संबद्ध निजी उच्च शिक्षण संस्थानों ने भी एमबीए कोर्सेज से दूरी बनानी शुरू कर दी है। राजधानी के तीन निजी संस्थानों ने एमबीए कोर्सेज बंद कर दिए हैं जबकि कई अन्य ऐसा करने वाले हैं।
नहीं भर पा रही सीटें
शिक्षण संस्थानों के इस कदम को छात्रों के घटते रुझान से जोड़कर देखा जा रहा है। जानकारों की मानें तो कुछेक को छोड़ दिया जाए तो राजधानी के तमाम शिक्षण संस्थानों के लिए सीटें भर पाना भी मुश्किल हो रहा है। छात्र यहां के बजाय दिल्ली और एनसीआर की ओर रुख कर रहे हैं। नतीजतन यहां की आधी से ज्यादा सीटें खाली रह जाती है।
ये हैं तीन कॉलेज
जीबीटीयू से संबद्ध राजधानी के तीन निजी उच्च शिक्षण संस्थानों ने आगामी शैक्षिक सत्र से एमबीए कोर्सेज में दाखिले बंद कर दिए हैं। इनमें सेंट्रल वीमेन कॉलेज ऑफ एजुकेशन, कॉलेज ऑफ इनोवेटिव मैनेजमेंट एंड साइंसेज और डीसीईटी बिजनेस स्कूल शामिल हैं।
दो साल में नहीं हुआ एक भी दाखिला
जानकारों की मानें तो पिछले दो वर्षों में यहां एक भी छात्र ने एडमिशन नहीं लिया। कॉलेज ऑफ इनोवेटिव मैनेजमेंट एंड साइंसेज के निदेशक डॉ. सुजीत विक्टर ने बताया कि उन्होंने कुछ तकनीकी कारणों के चलते एमबीए कोर्स बंद करने का फैसला लिया। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि पिछले वर्षों में छात्र संख्या में भारी गिरावट आई है।
सिर्फ बिजनेस न बने एजुकेशन
लखनऊ विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट साइंस में ओएसडी प्रो. अरविंद मोहन कहते हैं कि निजी शिक्षण संस्थानों का संचालन सिर्फ बिजनेस के रूप में किया जाता है। जरूरत कंपनियों के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन को तैयार करने की है। यदि कोई भी संस्थान ये करने में सफल हो जाता है तो वहां दाखिले के लिए लाइन लग जाएगी।