केशी घाट पर शुक्रवार दोपहर यमुना मुक्ति की प्रार्थना के बाद छटीकरा से हजारों यमुना भक्त दिल्ली की ओर चल पड़े। यमुना भक्त सड़क पर आए तो दिल्ली आगरा हाईवे थम गया। एक और ट्रैफिक प्रशासन ने रोक दिया था दूसरी ओर भी वाहनों के पहिए थम गए।
यात्रा अपराह्न अपने पहले पड़ाव पर पहुंचकर कर रुक गई। यात्रा के चलते ब्रज के सभी प्रमुख मंदिरों के कपाट एक घंटे के लिए बंद रहे। मथुरा और वृंदावन में व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान और कारोबार बंद रखकर यात्रा का समर्थन किया और इसमें शामिल हुए।
सुबह दस बजे संत जयकृष्णदास, गोकुल के पंकज बाबा के साथ संतों, श्रद्धालुओं ने केशीघाट पर यमुना मैया की मुक्ति की प्रार्थना की। इसके बाद हजारों ब्रजवासी वृंदावन से राधारानी पदयात्रा के प्रारंभिक स्थल छटीकरा के निकट हाईवे पर पहुंच गए।
यहीं पर एक दिन पहले से डटे किसानों और ब्रजवासियों का संगम हुआ। श्री राधे-श्री राधे की गूंज के साथ यमुना मैया के जयकारे लगाती श्रद्धालुओं की टोली दिल्ली की ओर निकल पड़ी। आगरा और भरतपुर से आने वाला ट्रैफिक को यमुना एक्सप्रेस वे की ओर मोड़ दिया गया। एनएच-टू पर तीन घंटे तक यातायात पूरी तरह बंद रहा। मथुरा-वृंदावन में अभूतपूर्व बंदी रही। यात्रा दोपहर 2:15 पर अपने पहले पड़ाव चौमुंहा पहुंच गई।
यात्रा में प्रमुख रूप से ब्रज के विरक्त संत रमेश बाबा, संत जयकृष्णदास, भारतीय किसान यूनियन भानु गुट के राष्ट्रीय अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह, गुजरात के किशोर चंद्र महाराजश्री, पुष्टिमार्गीय आचार्य चिम्मन लाल बाबा, गोकुल के पंकज बाबा, कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता प्रदीप माथुर, यमुना रक्षक दल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अशोक अग्रवाल, यमुना रक्षक दल के कार्यकारी अध्यक्ष सुनील सिंह प्रमुख रूप से शामिल रहे।