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ट्रेन डकैतीः पढ़िए दिल दहलाने वाली दास्तान

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संगम एक्सप्रेस में सवार यात्री सोमवार की रात को हुए इस खौफनाक मंजर को ताउम्र भुला नहीं पाएंगे। रात के अंधेरे में सुनसान इलाके में खड़ी ट्रेन और हथियारों से लैस डकैतों को देखकर यात्री दहशत इतने दहशतजदा हो गए कि चीख भी नहीं निकली। गोलियों की तड़तड़ाहट के बाद तो ऐसा खौफ फैला कि कोई सीट के नीचे तो कोई टॉयलेट में जा छिपा।
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बोगी एस-2 व एस-3 के यात्रियों को न तो जेवर की फिक्र थी और न ही नकदी, कीमती सामान की। फिक्र थी तो महिलाओं को अपनी आबरू की और पुरुषों को जान की। लड़कियां इस डर से सहमी सी सिर झुकाए बैठी रहीं कि कहीं कोई दरिंदा उनकी इज्जत तार-तार न कर दे। कुछ यात्रियों ने तो लगेज बैगों को अपने ऊपर रखकर छिपने की कोशिश की, लेकिन बुरी तरह पीटे गए। दहशत के 50 मिनट यात्रियों पर पचास वर्ष की तरह भारी रहे।

ट्रेन के इटावा स्टेशन पर पहुंचने के बाद यात्रियों की आंखें इस खौफनाक मंजर की गवाही दे रहीं थीं। यात्रियों में दहशत इस कदर थी कि उनकी जुबां बोलने में लड़खड़ा रही थी। कुछ तो थर-थर कांप रहे थे। इटावा में होने की बात पर बोले, मुख्यमंत्री अपने घर पर सुरक्षा नहीं दे सकते तो पूरे प्रदेश को क्या सुरक्षा देंगे। डरे सहमे यात्रियों ने खौफनाक मंजर की कहानी आंखों देखी बताई तो रोंगटे खड़े हो गए।
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हर एक पल पड़ा हजारों जान पर भारी

कानपुर से मेरठ जा रहे सहारनपुर निवासी प्रदीप कुमार ने बताया रात के करीब 12:30 बजे ट्रेन भरथना रेलवे स्टेशन से इटावा की ओर रवाना हुई। सभी यात्री अपनी-अपनी बर्थ पर चैन की नींद सो रहे थे। इसी बीच ट्रेन में चेन पुलिंग हुई और ट्रेन सुनसान जगह पर खड़ी हो गई। यात्री कुछ समझ पाते कि इससे पहले दर्जन भर हथियारबंद बदमाशों ने बोगी को कब्जे में कर लिया और लूटपाट शुरू कर दी।

बबेरू, बांदा निवासी कुलदीप सिंह उस मंजर से अभी उभर नहीं पाए। बोले, यात्री अभी पूरी तरह नींद से जाग भी नहीं पाए थे कि अचानक फायरिंग की आवाज ने उनके होश उड़ा दिए। एक साथ करीब बीस राउंड फायर होने से पूरी ट्रेन के यात्री दहशत में आ गए और छिपने के लिए जगह ढूंढने लगे। यात्रियों के मुताबिक ऐसा लग रहा था कि ट्रेन किसी दूसरे मुल्क में प्रवेश कर गई है और वहां की सेना ट्रेन को घेरकर ताबड़तोड़ फायरिंग कर रही है।

डकैतों की गोलियों के बीच मारपीट का शिकार हो रहे यात्रियों की चीख ने रात का सन्नाटा चीर कर रख दिया। रनियां, कानपुर निवासी रूद्र प्रताप सिंह ने बताया कि ऐसा लग रहा था जैसे आज जीवन का आखिरी दिन है। सभी बदमाशों के सिर पर खून सवार था। लड़कियों के साथ अभद्रता देखकर खून खौल रहा था कुछ करने की स्थिति में नहीं थे। एक-एक कर सभी के जेवर छीन लिए।

तो टूट गई जिंदा बचने की उम्मीद

लुटेरों ने जैसे ही ट्रेन यात्री हरिओम के सीने पर गोली दागी तो कोच के बाकी यात्रियों ने भी उम्मीद छोड़ थी कि आज वह जिंदा बचेंगे।

दो बच्चों समेत सफर पर निकली महिला यात्री ने बताया कि गेट पर खड़े युवक फायर झोंके जा रहे थे और कोच के अंदर युवक यात्रियों को डंडे से पीटकर लूट रहे थे।

दहशत के मारे कुछ यात्री सीट के नीचे छिपे तो कुछ ने टॉयलेट में छिपने की कोशिश करने लगे। पचास मिनट, 50 वर्षों की तरह कटे।

युवती की चीख से दहल गए थे लोग

डकैतों ने जब युवती को ट्रेन से नीचे उतारने की कोशिश की तो वह खूब गिड़गिड़ाई। डकैत नहीं माने तो बचाव के लिए दम भर चीखी। एक लड़की के साथ इस तरह की बर्बरता देख अन्य महिलाएं व लड़कियां भी सहम गईं।

लोगों से जब देखा नहीं गया तो एक शख्स ने हिम्मत जुटाकर विरोध किया। इस पर और लोग भी बोल पड़े। डकैतों को ये बात नागवार गुजरी और उन्होंने यात्रियों पर गोलियां बरसा दीं।

तीन लोग खून से लथपथ होकर वहीं गिर पड़े। पूरी बोगी में बस चीत्कार सुनाई पड़ रही थी।

जब संगम एक्सप्रेस पहुंची मेरठ

मंगलवार सुबह मेरठ पहुंची ट्रेन से उतरे यात्रियों ने आपबीती सुनाई। जेल चुंगी निवासी कुसुम और उनकी बेटी मोनिका इलाहाबाद से मेरठ आ रही थीं। वह एस 3 में थीं। कुसुम ने बताया कि देर रात करीब 12:30 बजे एकाएक इटावा से 15 किलोमीटर पहले ट्रेन जंगल में रुकी। कुछ समझ पाते, तब तक बदमाशों ने धावा बोल दिया। किसी के हाथ में चाकू, तो किसी के हाथ में तमंचा था। यात्री अपनी जान बचाने की कोशिश में कोई सीट के नीचे तो कुछ बाथरूम में छिप गए।

उन्होंने बताया कि करीब डेढ़ घंटे तक बदमाशों ने लूटपाट मचाई। का तांडव  वहीं, सहारनपुर के राजकुमार पाराशर ने बताया कि मैं कानपुर से आ रहा था और एसी 3 के बी 1 कोच में था। बदमाशों ने डिब्बे का दरवाजा जोर-जोर से पीटा, हमने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। सवारियां चिल्लाने लगीं।

एस 3 में सवार जेल चुंगी निवासी दिनेश चौहान एडवोकेट, सोंटा (मुजफ्फरनगर) निवासी प्रवेश राठी ने बताया कि बराबर के डिब्बे एस 2 से डंडे बरसाने और यात्रियों की चीख पुकार की आवाज आ रही थी, तो सभी यात्री घबराहट में खुद को बचाने के लिए हड़बड़ा रहे थे।
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सिपाही ने उतार दी वर्दी

एस 2 में बर्थ नंबर 17 पर आने वाली पुष्पा सेंगर ने बताया कि एक सिपाही बर्थ नंबर 18 पर था। वह वर्दी में था, उसकी पत्नी भी साथ थी। बदमाशों ने ट्रेन में लूटपाट शुरू की तो सिपाही ने यात्रियों को बचाने की जरूरत नहीं समझी, बल्कि अपनी वर्दी उतारकर खुद को बचाने के लिए भाग खड़ा हुआ। पुष्पा ने बताया कि अन्य यात्री सिपाही की हरकत पर काफी भला बुरा करते नजर आए।

बदमाशों की हैवानियत बयां कर रहे थे निशान  
डकैतों ने संगम एक्सप्रेस में किस कदर हैवानियत का खेल खेला, उसके निशान मेरठ स्टेशन पहुंची ट्रेन में बाकी थे। एस 2 डिब्बे के बोगी में जिस सीट पर युवक को गोली मारी गई, वहां खून और मांस के लोथड़े जमे थे। वहीं, बोगी की प्लाईवुड की दीवार में छेद हो गया। ट्रेन में आए यात्रियों के परिजनों की भी भीड़ लग गई। ट्रेन से उतर रहे यात्रियों के चेहरे से हवाईयां उड़ीं थीं, वहीं उनके परिजनों की आंखें भर आईं। कुछ लोग ट्रेन में मचाई गई दरिंदगी के फोटो अपने मोबाइल में कैद करने लगे।

ऐसी दहशत, बच्चे को ही भूल गया यात्री
ट्रेन से उतरे यात्रियों में दहशत का ये आलम था कि एक यात्री ने अपने बच्चे को सामान से भरी बोरियों के ऊपर बैठा दिया तथा ट्रेन से सामान उतारने चला गया। काफी देर तक बच्चा अकेला बैठा रहा, लोग पूछते रहे बच्चा किसका है। फिर युवक वहां पहुंचा और बोला कि यह बच्चा मेरा है।
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