एएमयू में इतिहास विभाग के प्रोफेसर अली अथर ने दावा किया है कि ताजमहल पब्लिक फंड से नहीं बनाया गया था। उन्होंने उत्तर प्रदेश के नगर विकास एवं संसदीय कार्यमंत्री मंत्री आजम खां द्वारा ताजमहल के संदर्भ में दिए गए बयान पर यह बात कही।
प्रो. अली ने कहा कि ताजमहल को शाहजहां ने खलीसा भूमि से प्राप्त होने वाली अपनी आमदनी से बनवाया था। जबकि आजम खां इसे पब्लिक फंड के पैसे से बनवाने के आधार पर ढहाए जाने की बात कह रहे हैं। प्रो. अथर अली कहते हैं कि ताजमहल भारत की सांस्कृतिक धरोहर है। शाहजहां ने इसे बनवाने को 20 हजार परिवारों को 22 वर्षों के लिए नियुक्त किया था।
उन्होंने सवाल किया कि क्या 22 वर्षों तक 20 हजार परिवरों को रोजगार देना अपराध है? क्या आजम खां ताजमहल में लिखी पवित्र कुरान की आयतों को भी ढहा देना चाहते हैं? उन्होंने कहा कि ताजमहल के निर्माण के संबंध में सभी प्रकार के ऐतिहासिक और गैर ऐतिहासिक दस्तावेज मौजूद हैं। वह चाहें तो पढ़ सकते हैं।
गौरजलब है कि आजम खां ने कहा था कि सरकारी खजाने की फिजूलखर्जी कर किसी महबूबा की याद में ताजमहल जैसी इमारत बनाना गलत है। बाबरी विध्वंस के वक्त लोग अगर मसजिद गिराने के बजाए ताजमहल गिराते तो वह उनमें सबसे आगे होते।