उत्तर प्रदेश के लोकनिर्माण और सिंचाई मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने आईएएस दुर्गाशक्ति नागपाल की निलंबन वापसी से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि निलंबन वापसी पर कोई विचार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि अधिकारियों को अपनी हद में रहना चाहिए। जब गांव के किसी व्यक्ति ने मस्जिद निर्माण को लेकर कोई शिकायत नहीं की थी तो यह अधिकारी वहां गई ही क्यों? सपा नेता ने कहा कि यह खनन का मामला नहीं है। सीधे-सीधे प्रशासनिक मामला है।
शिवपाल बुधवार को यहां पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बड़ा दंगा बचाने के लिए नोएडा की एसडीएम दुर्गाशक्ति नागपाल का निलंबन किया गया है।
उनके मस्जिद की दीवार गिरवाने से वहां स्थितियां बिगड़ गई थीं। सरकार ने शांति बनाए रखने और दंगा रोकने के लिए इस अधिकारी को निलंबित किया। अखिलेश सरकार के एक प्रभावशाली मंत्री का रुख सामने आ जाने के बाद आईएएस एसोसिएशन की दुर्गाशक्ति के निलंबन वापसी और दोबारा बहाली की मांग के अधर में लटकने का अंदेशा जताया जा रहा है।
खनन हो ही नहीं रहा तो कहां से आ गए माफिया
इस सवाल पर कि जिलाधिकारी ने खनन से संबंधित कई कागजों का उल्लेख किया है, शिवपाल ने कहा कि सरकार ने भी तथ्यों केआधार पर कार्रवाई की है। वहां आसपास खनन की कोई जगह ही नहीं है तो खनन माफिया कहां से आ गए।
इस सवाल पर कि बुधवार को भी वहां एक हत्या के पीछे भी खनन माफिया का हाथ बताया जा रहा है। शिवपाल ने कहा कि यह सब झूठ है। आज हुई हत्या की असली वजह रंजिश है।
दारोगा की बात मानोगे या सरकार की:
यह पूछने पर कि स्थानीय दारोगा भी कह रहे हैं कि मस्जिद की दीवार का कोई मामला नहीं था? शिवपाल ने पत्रकारों से कहा, ‘दारोगा की बात मानोगे या सरकार की। सरकार बड़ी है, या दारोगा।’
यह भी जोड़ा, ‘जब खनन माफिया सक्रिय थे। मैं रोज आप लोगों को बुलाकर बताता था, तब तो आप लोगों ने कुछ नहीं लिखा। अब जब अवैध खनन पर पूरी तरह रोक लगी हुई है। खनन माफिया कहीं दिख नहीं रहे हैं तो आप लोग लोग खनन माफिया के सक्रिय होने का आरोप लगा रहे हैं।’