सुल्तानपुर। मकान पर कब्जे के विवाद में 15 साल पहले गल्ला व्यवसायी अखिलेश वर्मा की हत्या के मामले में एडीजे तृतीय की अदालत में पांच दिन पूर्व दोषी ठहराए गए अभियुक्तों की सजा पर सुनवाई के लिए सोमवार को फैसले की कार्यवाही बाधित रही। सेशन जज श्याम मोहन जायसवाल की कोर्ट ने मामले में दोषी सगे भाई दीपक वर्मा, प्रदीप वर्मा, सहआरोपी ओमप्रकाश,उनके पुत्र उमेश कुमार व छोटेलाल निषाद की सजा पर सुनवाई के लिए सात अक्तूबर की तारीख तय की है।
दोस्तपुर थाने के देवरी गांव निवासी अनिल वर्मा ने 24 जुलाई 2011 की घटना बताते हुए अखंडनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उनके आरोप के मुताबिक उनकी बहन नीलम का विवाह अंबेडकरनगर जिले के अकबरपुर के रसूलपुर के रहने वाले अखिलेश वर्मा से हुआ था। वादी के मुताबिक उनके जीजा व बहन नीलम अखंडनगर थाने के डोमापुर में मकान बनवाकर रहते थे। वादी के मुताबिक उनके मकान के बारे में डोमापुर के ही रहने वाले राजमणि पक्ष से विवाद चल रहा था।
24 जुलाई 2011 की शाम को शाहपुर निवासी आरोपी छोटेलाल केवट ने वादी के जीजा अखिलेश को फोन करके बुलाया था। इसके बाद अखिलेश गड़ौरा चले गए थे, लेकिन वह वापस नहीं आए। 25 जुलाई 2011 की सुबह गड़ौरा में उनका शव मिला था। पुलिस ने अभियुक्त राजमणि वर्मा, उनके पुत्र दीपक वर्मा, प्रदीप वर्मा, सह आरोपी ओमप्रकाश, उनके पुत्र उमेश, बृजेश उर्फ मोटू वर्मा एवं छोटेलाल निषाद एवं एक बाल अपचारी के खिलाफ आरोप पत्र पेश किया था। इस मामले में ट्रायल के दौरान आरोपी राजमणि की मृत्यु हो चुकी है, जबकि पांच अभियुक्तों के खिलाफ ट्रायल पूरा हो चुका है।