सुल्तानपुर। ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) ने नई रणनीति तैयार की है। अब स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी कृषि सखियों को गर्मी की सब्जियों के उत्पादन और विपणन के लिए प्रेरित किया जाएगा। कम लागत और कम समय में तैयार होने वाली भिंडी, तोरई, लौकी, कद्दू और खीरा जैसी फसलों पर विशेष जोर रहेगा।
जिले के सभी 14 विकास खंडों में एक हजार से अधिक कृषि सखियों का चयन किया जा चुका है। ये महिलाएं पशुपालन, अनाज उत्पादन और मौसमी (बरसात व सर्दी) सब्जियों की खेती तक सीमित थीं, लेकिन गर्मी के मौसम में खेती का दायरा सीमित होने से आय पर असर पड़ता था। इस कमी को दूर करने के लिए गर्मी की सब्जियों को आय का नया जरिया बनाया जा रहा है।
एनआरएलएम के उपायुक्त केडी गोस्वामी ने बताया कि कम लागत में तैयार होने वाली इन सब्जियों की बाजार में लगातार मांग रहती है। सही तरीके से खेती और बिक्री करने पर महिलाएं बेहतर मुनाफा कमा सकती हैं।
कम लागत, ज्यादा मुनाफा, यही है फॉर्मूला
भिंडी, तोरई, लौकी, कद्दू और खीरा जैसी सब्जियां कम समय में तैयार हो जाती हैं और इनकी बाजार में लगातार मांग बनी रहती है। सिंचाई और देखभाल की लागत भी अपेक्षाकृत कम होती है। ऐसे में छोटे स्तर पर भी खेती शुरू कर महिलाएं नियमित आय अर्जित कर सकती हैं। साथ ही समूह के जरिये बिक्री करने पर बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है।