सुल्तानपुर। प्रधानमंत्री के आह्वान पर रविवार से देशभर में 100 दिवसीय नशा मुक्त भारत अभियान शुरू हो गया। जिले की स्थिति चिंताजनक नहीं है। मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग की ओपीडी में प्रतिदिन दो से तीन नए युवा नशे की लत से छुटकारा पाने के लिए पहुंच रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज के नशामुक्ति केंद्र में मरीजों का इलाज किया जाता है। अधिकांश किशोर और युवा वर्ग आ रहे हैं। मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. राम अनुज वर्मा ने बताया कि नशे की लत एक बीमारी है। इसका इलाज संभव है। समय पर पहचान, नियमित काउंसिलिंग और परिवार का सहयोग मरीज को सामान्य जीवन में वापस ला सकता है। कई मरीज नशे के साथ अवसाद, अनिद्रा, तनाव और चिड़चिड़ापन जैसी समस्याओं से भी जूझ रहे हैं। ऐसे मामलों में केवल दवा ही पर्याप्त नहीं होती। लंबी काउंसिलिंग और परिवार का सहयोग भी जरूरी होता है।
सोशल मीडिया का प्रभाव भी एक बड़ा कारण विशेषज्ञों का कहना है कि गलत संगत, बेरोजगारी और मानसिक तनाव युवाओं को नशे की ओर धकेल रहे हैं। सोशल मीडिया का प्रभाव भी एक बड़ा कारण है। नशे की शुरुआत अक्सर दोस्तों के साथ शौक के रूप में होती है। धीरे-धीरे लत में बदल जाती है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रियांक वर्मा ने बताया मानसिक रोग विभाग अब स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाएगा।
परिवार इन संकेतों को न करें नजरअंदाज
व्यवहार में अचानक बदलाव
पढ़ाई या नौकरी में रुचि कम होना
घर से दूरी और अकेलापन
गलत संगत और साथियों का दबाव
बेरोजगारी और भविष्य की चिंता
मानसिक तनाव और अवसाद
बार-बार पैसों की मांग
गुस्सा, चिड़चिड़ापन या अनिद्रा
पुराने दोस्तों से दूरी, नए संदिग्ध साथियों का साथ