सुल्तानपुर। कोरोना वायरस में लॉकडाउन के दौरान कोटा में फंसे 89 छात्र-छात्राओं में 16 बच्चों को लेकर पहली बस रविवार दोपहर बाद जिले में पहुंची। हाथरस डिपो की बस से उतरते ही छात्र-छात्राओं के चेहरे खुशी से खिल उठे।
सभी बच्चों की शहर से सटे गनपत सहाय पीजी कॉलेज में चिकित्सकों की टीम ने जांच की। जांच के बाद सभी को फिलहाल कॉलेज में ही क्वारंटीन में रखा गया है। इसी बस में सवार अमेठी के 12 बच्चों को वहां उतारा गया है।
राजस्थान के कोटा में सुल्तानपुर और अमेठी जिले के 89 छात्र-छात्राएं रहकर पढ़ाई करते हैं। कोरोना वायरस से बचाव को लेकर हुए लॉकडाउन सभी बच्चे कोटा में फंस गए थे। तमाम अभिभावकों ने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ से बच्चों को घर बुलाने की मांग की थी।
प्रदेश सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शनिवार को कई बसें कोटा भेजी थीं। सुल्तानपुर और अमेठी जिले के 89 छात्र-छात्राओं को लाने के लिए प्रदेश सरकार ने हाथरस डिपो की बस संख्या यूपी 81 बीटी 5703, अलीगढ डिपो की बस संख्या यूपी 77 एएन3007 और औरेया डिपो की बस संख्या यूपी 79 टी 6643 को लगाया था।
शनिवार की शाम पांच बजे हाथरस डिपो की बस को लेकर चालक जगदीश प्रसाद, विकास कुमार और परिचालक राजेंद्र कुमार शर्मा जिले में पहुंचे। इस बस में 28 बच्चे व एक अभिभावक सवार था। इन बच्चों में 12 अमेठी जिले के थे।
बस रास्ते में मात्र फतेहपुर सिकरी के पास प्रशासन की ओर से निर्धारित स्थान पर रुकी और सभी ने भोजन किया था। इसके बाद बस लगातार चलती हुई रविवार की दोपहर करीब दो बजे अमेठी जिले के जगदीशपुर पहुंची, जहां पर अमेठी जिले के 12 छात्रों को उतारकर अमेठी जिला प्रशासन के सुपुर्द कर दिया गया।
इसके बाद 16 छात्र-छात्राओं व एक अभिभावक को लेकर बस सुल्तानपुर पहुंची। इनमें 13 छात्र और तीन छात्राएं शामिल थीं। शहर से सटे गनपत सहाय पीजी कॉलेज में बच्चों की जांच की गई। साथ ही उन्हें क्वारंटीन किया गया।
शहर के दरियापुर निवासी तौकीर के पुत्र शेख अमान ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान कोटा में काफी परेशानी हो रही थी। कोचिंग बंद होने की वजह से पढ़ाई भी नहीं हो पा रही थी। शुरुआत में दोस्तों के साथ समय बीत जाता था लेकिन फिर ऊब लगने लगी।
घर वालों से फोन पर रोज बात होती थी। मन नहीं लग रहा था। यही मन करता कि कितनी जल्दी अपने घर पहुंच जाएं। घर वाले लगातार ढांढस बंधाते रहे। आखिर वह दिन भी आ गया कि अपने जिले की धरती पर पहुंच गए।
दूबेपुर ब्लॉक निवासी दिनेश मिश्र का पुत्र ऋषभ मिश्र भी कोटा में रहकर पढ़ाई करता है। ऋषभ ने बताया कि लॉकडाउन में कोटा में खाने-पीने की परेशानी नहीं हुई लेकिन मन नहीं लग रहा था। इधर, घर वाले परेशान थे। कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था। आखिर यूपी सरकार ने रास्ता निकाल लिया। कोटा से बस ने सुल्तानपुर के लिए कूच किया तो मन खुशी से झूम उठा। बस जिले के बॉर्डर पर पहुंची तो लगा कि परिवार में आ गए।