फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रमाशंकर ने जान देकर चुकाई जन सूचना मांगने की कीमत

विज्ञापन
विज्ञापन
सुल्तानपुर। दोस्तपुर थाना क्षेत्र गांगूपुर निवासी रमाशंकर वर्मा की दिनदहाड़े हुई हत्या से जनसूचना अधिकार अधिनियम के अनुपालन की भी पोल खुल गई है। उन्हें महीनों बाद ग्राम पंचायत के संबंध में मांगी गई जनसूचना की न सूचना मिली और न ही शिकायत पर ग्राम प्रधान व सेक्रेटरी के खिलाफ कार्रवाई हो सकी। आखिर में शिकायत की कीमत रमाशंकर को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।
विज्ञापन

होली के दिन ग्राम प्रधान धर्मेंद्र वर्मा के घर से लौटते समय हुई रमाशंकर वर्मा की हत्या के पीछे जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई सूचना ही अहम वजह बनी। रमाशंकर वर्मा ने ग्राम पंचायत में एक खड़ंजा को बनवाए बिना भुगतान किए जाने, प्रधानमंत्री आवास की धनराशि दूसरे के खाते में भिजवाने व प्रसाधन निर्माण में कई पात्रों की धनराशि दूसरे के खाते में भिजवाकर उसे निकालने की वर्ष 2019 में बीडीओ से जनसूचना मांगी थी।
जनसूचना नहीं मिलने पर 13 सितंबर 2019 को मुख्य विकास अधिकारी को शिकायती पत्र देकर ग्राम पंचायत में अनियमितता की जांच कराने की मांग की थी। इसमें प्रसाधन निर्माण में भी अनियमितता का आरोप लगाया गया था। अधिकारियों के संज्ञान मेें प्रकरण आया तो बीडीओ ने शिकायतकर्ता को मांगी गई सूचना का विवरण वेबसाइट पर उपलब्ध होने का पत्र भेज दिया।
विज्ञापन

शिकायतकर्ता ने जब उस पर असंतोष जताया तो ब्लॉक की ओर से तीनों बिंदुओं की जनसूचना उपलब्ध कराने के लिए ग्राम पंचायत के खाते में आठ हजार रुपये जमा करने का निर्देश दे दिया गया। इसके बाद शिकायतकर्ता रमाशंकर वर्मा ने न तो पैसा जमा किया और न ही उसे जनसूचना मिल सकी। यही नहीं सीडीओ ने सितंबर में शिकायती पत्र मिलने पर उसे दोस्तपुर के बीडीओ को कार्रवाई के लिए भेजा लेकिन उस पर भी कार्रवाई नहीं हो सकी। अंत में रमाशंकर को शिकायत की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।
बीडीओ दोस्तपुर आलोक आर्या ने बताया कि रमाशंकर वर्मा ने जनसूचना मांगी थी। उसे आठ हजार रुपये ग्राम पंचायत के खाते में जमा करने को कहा गया था। पैसा जमा नहीं होने की वजह से सूचना नहीं दी गई। बताया कि ग्राम पंचायत की कोई जांच ब्लॉक में लंबित नहीं है। जिला पंचायतराज अधिकारी केके सिंह चौहान ने बताया कि गांगूपुर ग्राम पंचायत की कोई जांच विभाग में लंबित नहीं है। जनसूचना के संबंध में भी विभाग में कोई पत्र नहीं आया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें