कूरेभार (सुल्तानपुर)। राहुल गांधी ने जिस जूते और चप्पल की सिलाई की है, उसे रामचेत अपनी दुकान में शीशे का फ्रेम बनवाकर सजाएंगे। वे उसे किसी कीमत पर बेचने या लौटाने को तैयार नहीं हैं। कहते हैं कि एक अजनबी फोन करके मुंहमांगी कीमत देने की बात कर रहे थे। मैंने इन्कार कर दिया। इसे हमारे मसीहा ने हाथ लगाया है। यह अनमोल है। इसे जान के टुकड़े की तरह रखेंगे।
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के पास कूरेभार के विधायकनगर चौराहे पर मोची रामचेत अब बेहद व्यस्त हैं। व्यस्तता केवल जूते व चप्पल की मरम्मत तक ही नहीं है। बल्कि दिन में इतने लोग उनसे मिलने आते हैं कि अब वे लोगों को ज्यादा समय भी नहीं दे पाते हैं। लोग आकर सामने बेंच पर बैठे रहते हैं और रामचेत अपना काम निपटाते रहते हैं। सोमवार की शाम अपनी दुकान पर बैठे रामचेत से जब पूछा गया कि आखिर वह कौन सी चप्पल और जूता है, जिसे कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सिला था? रामचेत ने बड़े गर्व से वह चप्पल दिखाई।
फिर कहा कि जो जूता राहुल गांधी ने सिला था वह तो हमारा है, लेकिन यह चप्पल किसी ग्राहक की है। मगर अब वे इसे किसी को देंगे नहीं। आखिर किसी को देंगे क्यों नहीं? इस सवाल पर वे बोले कि एक फोन आया था, कह रहे थे कि झोले में भरकर जितना चाहो पैसा दे देंगे इस चप्पल का, लेकिन मैंने इन्कार कर दिया। यह हमारे मसीहा की निशानी है।
कौन हैं रामचेत
सदर तहसील क्षेत्र के गांव ढेसरुआ के गोसाईं की मठिया के रहने वाले मोची रामचेत कूरेभार थाना क्षेत्र के विधायकनगर चौराहे पर जूता-चप्पल मरम्मत करने का काम करते हैं। 26 जुलाई को सुल्तानपुर में कोर्ट की पेशी से लखनऊ के लिए जा रहे लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और रायबरेली के सांसद राहुल गांधी उनकी दुकान पर कुछ देर रुके थे और अपने हाथों से एक चप्पल और जूते की सिलाई की थी। बस तभी से रामचेत अचानक सुर्खियों में आ गए।