सुल्तानपुर। विश्व पर्यावरण दिवस पर गांवों में पीपल, बरगद और पाकड़ (हरिशंकरी) के पौधे रोपित किए जाएंगे। वन विभाग ने इसकी मुकम्मल तैयारी कर ली है। जिले की 979 ग्राम पंचायतों में 2,937 हरिशंकरी पौधे लगाने का लक्ष्य है। आध्यात्मिक व वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पर्यावरण संतुलन में विशेष महत्व वाले इन पौधों की देखभाल ग्राम पंचायत के जिम्मे होगी।
पीपल, बरगद व पाकड़ के सम्मिलित रोपण को हरिशंकरी कहते हैं। पीपल में त्रिदेवों यानि ब्रह्मा, विष्णु व महेश का वास माना जाता है। बरगद के वृक्ष को लेकर मान्यता है कि इसकी शाखाओं में विष्णु का निवास होता है। बरगद सदाहरित विशालकाय छाया वृक्ष है। पाकड़ का वृक्ष भी देवताओं की ओर से संरक्षित माना जाता है। पाकड़ सदा हरा-भरा रहने वाला वृक्ष है। इसका छत्र काफी फैला हुआ और घना होता है। इसकी शाखाएं जमीन के समानांतर काफी नीचे तक फैल जाती हैं। इससे घनी शीतल छाया मिलती है। पीपल एकलौता पौधा है जो 24 घंटे ऑक्सीजन का उत्सर्जन करता है। आध्यात्मिक व वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पर्यावरण संतुलन में विशेष महत्व रखने वाले ये पौधे पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन का उत्सर्जन करते हैं।
इस बार पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर कांफ्रेंस ऑफ पंचायत का आयोजन किया जा रहा है। राष्ट्रीय आयोजन के इस कार्यक्रम में देश के नामचीन विज्ञानी, विशेषज्ञों के साथ शासन के मंत्री और अधिकारी भी जुड़ेंगे। इसमें सभी ग्राम प्रधान भी वर्चुअल माध्यम से जुड़ेंगे। वन विभाग की तरफ से पर्यावरण संरक्षण के लिए जिले की 979 ग्राम पंचायतों में पांच जून को 2,937 हरिशंकरी के पौधे रोपित किए जाएंगे। पौधरोपण स्थल पर सुरक्षा व सिंचाई व्यवस्था के भी इंतजाम किए जाने के निर्देश भी शासन ने दिए हैं। पौधों की देखरेख का जिम्मा ग्राम पंचायतों पर रहेगा। रोपण के लिए नर्सरी पर पौधे तैयार कर लिए गए हैं।