पितृ विसर्जन पर बुधवार को हिंदू धर्म के लोगों ने अपने पूर्वजों को विदाई दी। आदि गंगा गोमती में स्नान के बाद सीताकुंड घाट पर लोगाें ने पूर्वजों के तर्पण के लिए पिंडदान किया। शुद्धता के लिए मुंडन कराकर धन, वस्त्र एवं खाद्य सामग्री गरीबों को दान किया।
14 दिनों तक चलने वाले पितृपक्ष का बुधवार को समापन हो गया। हिंदू धर्म की मान्यता है कि इस पक्ष में पूर्वज धरती पर अपने वंशजों से सेवा लेने आते हैं। इस पक्ष में लोग अपने पूर्वजों को स्नान के बाद कुश व काला तिल के साथ पानी देते हैं। अमावस्या के दिन मंत्रोच्चार के बीच पिंडदान एवं अन्य प्रकार के दान कर अपने पूर्वजों की विदाई करते हैं। बुधवार को अमावस्या के दिन सीताकुंड घाट पर गोमती नदी के किनारे सुबह से ही पिंडदान करने वाले लोग इकट्ठा होने लगे।
लोगों ने आदि गंगा गोमती में स्नान कर अपने पूर्वजों को पानी दिया। इसके बाद लोगों ने पुरोहित के मंत्रोच्चार के बीच पिंडदान किया। कुछ लोगों ने गोमती में स्नान के बाद गोदान भी कराया। नदी के किनारे नहीं पहुंच पाने वाले लोगों ने घरों पर ही अपने पूर्वजों का रीति रिवाज एवं परंपरा के अनुसार पूर्वजों का तर्पण किया।