सुल्तानपुर। टांडा-बांदा हाईवे पर लोहरामऊ रेलवे क्रॉसिंग पर बने ओवरब्रिज के दक्षिणी छोर का एक गर्डर फिर टूट गया है। गर्डर टूटने से उसके पास के ब्रिज की गिट्टी उखड़ गई है। वाहनों के आवागमन से ब्रिज के लोहे का जाल खुल गया है। हाईवे के ब्रिज के लगातार क्षतिग्रस्त होने से उसकी गुणवत्ता सवालों के घेरे में आ गई है।
शहर के समीप से गुजरे टांडा-बांदा हाईवे पर लोहरामऊ रेलवे क्रॉसिंग पर निर्मित ओवरब्रिज का दक्षिणी छोर पर लगा एक लोहे का गर्डर फिर टूट गया है। लोहे का गर्डर टूटने से बाद वाहनों के आवागमन से उसके आसपास की गिट्टियां उखड़ गई हैं और लोहे का लगा जाल नंगा हो गया है। करीब 35 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित ओवरब्रिज पर वाहनों का संचालन करीब चार तीन से शुरू हुआ है। तीन साल में करीब आधा दर्जन बार ओवरब्रिज के विभिन्न हिस्से टूटकर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। ब्रिज के दक्षिणी छोर का टूटा लोहे का गर्डर भी एक बार पहले और टूट चुुका है। अभी करीब एक पखवारे पहले ब्रिज के उत्तरी छोर का कुछ हिस्सा टूटकर धंस गया था।
सूचना पर एनएचएआई ने उस हिस्से पर वाहनों का आवागमन रोक कर मरम्मत करवाया था। अभी मरम्मत वाले हिस्से पर वाहनों का आवागमन शुरू नहीं हो सका है। इस बीच दक्षिणी छोर का एक गर्डर टूट गया है। दक्षिणी छोर की तरफ स्थित दूसरे गर्डर पर भी थोड़ा ब्रिज जर्जर हो गया है। अभी करीब छह माह पहले ही एनएचएआई ने इस हाईवे को कार्यदायी संस्था से अपने कब्जे में लिया है। बार-बार ओवरब्रिज क्षतिग्रस्त होने से इसकी गुणवत्ता पर सवाल खड़ा हो गया है। फिलहाल कार्यदायी संस्था पर अभी तक एनएचएआई की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
जांच में कार्यदायी संस्था की मिली लापरवाही
एनएचएआई के परियोजना निदेशक एसबी सिंह का कहना है कि ओवरब्रिज की जांच कराई गई है। रिपोर्ट में कार्यदायी संस्था की लापरवाही पाई गई। इसकी वजह से कार्यदायी संस्था से ही ब्रिज की मरम्मत कराई गई है। एकतरफ क्षतिग्रस्त ब्रिज की मरम्मत करा दी गई है। ब्रिज के अन्य क्षतिग्रस्त हिस्से की भी कार्यदायी संस्था से मरम्मत कराई जाएगी।