सुल्तानपुर। मोहर्रम बुधवार से मोहर्रम शुरू हो रहा है। मोहर्रम का चांद निकलते ही मंगलवार से अजादारों ने काला लिबास पहन लिया। घर-घर में या हुसैन की सदाएं गूंज उठीं।
हुसैनी शिया वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष हैदर अब्बास खान ने बताया कि मोहर्रम एक ऐसा महीना है, जिसकी दसवीं तारीख को पैगम्बर मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन (अलैह सलाम) ने अपने 72 साथियों की शहादत करबला के मैदान में पेश कर इंसानियत के दुश्मन जालिम शासक यजीद से इस्लाम और इंसानियत को बचाया था।
उन्हीं इमाम हुसैन की याद में दो माह आठ दिन गम मनाया जाता है। हैदर अब्बास खां बताते हैं कि मोहर्रम गम का महीना है, जो इंसानियत का पैगाम देता है। मोहर्रम हमें अहिंसा, मानव अधिकार, मोहब्बत व एकता का पाठ पढ़ाता है।
हर वह इंसान हुसैनी है, जिसके अंदर मानवता और इंसानियत पाई जाती है। मोहर्रम बुधवार से शुरू हो रहा है। उन्होंने जिलेवासियों से आह्वान किया कि कोविड-19 को ध्यान में रखते मोहर्रम मनाएं।