सुल्तानपुर। जिले में बड़े पैमाने पर किसान सब्जियों की खेती करते हैं। सब्जियों की खेती से ही किसानों के घर-परिवार का खर्च चलता है। गर्मी के सीजन में उगाई जाने वाली सब्जियों में रोग अधिक लगते हैं। इसमें टमाटर, बैंगन, मिर्च व भिंडी प्रमुख रूप से शामिल हैं। सब्जियों में लगने वाले रोग की रोकथाम के लिए कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जेबी सिंह ने किसानों को दवाओं का छिड़काव करने की सलाह दी है।
टमाटर व बैंगन की फसल में फूल गिरना और फल गिरना मुख्य समस्या है। इसकी रोकथाम के लिए किसान टाईकंटानॉल को 1.25 मिली पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें तो फूलों का गिरना कम हो जाएगा और फलों की संख्या बढ़ने लगेगी। इसके अलावा रोपाई के 40-45 दिन बाद जिंक सल्फेट का 0.5 प्रतिशत का छिड़काव करने से भी फूल के गिरने की समस्या समाप्त हो जाती है।
मिर्च की फसल में फूल व फल को गिरने से रोकने के लिए टाईकंटानॉल को 1.25 मिली पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने से फूलों का गिरना कम हो जाता है। ऐसा करने से फलों की संख्या में वृद्घि होने लगती है। इसके अलावा पोटैशियम सल्फेट के एक प्रतिशत का घोल बनाकर छिड़काव करने से फूलों तथा फलों की संख्या में वृद्वि होती है और उत्पादन अधिक मिलता है। किसानों को मिर्च की फसल में वृद्वि के लिए बोआई के दो से ढाई महीने बाद नेफ्फालीन एस्पिक एसिड का छिड़काव करने से भी लाभ होता है।
भिंडी की बोआई के 35 दिन बीत जाने के बाद प्रति 10 दिन के अंतराल पर एनपीके का छिड़काव करने से उपज में वृद्वि होती है। यदि एनपीके नहीं उपलब्ध हो तो किसान एक प्रतिशत यूरिया तथा एक प्रतिशत म्यूरोटॉप पोटाश का मिश्रण बनाकर छिड़काव करें। इससे उपज में वृद्वि होती है। इस दौरान सब्जियों में रोग अधिक लगता है।