सुल्तानपुर में स्थित धान क्रय केंद्र।
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सुल्तानपुर। प्रशासनिक अधिकारी ही किसानों के धान बेचने की राह में रोड़ा बनकर सामने आए हैं।अधिकारियों की ओर से नाम व भूमि का सत्यापन नहीं किए जाने से जिले के 2305 किसानों का हजारों क्विंटल धान बिक्री के लिए अटका है। सत्यापन के अभाव में किसान अपना धान सरकारी क्रय केंद्रों पर नहीं बेच पा रहे हैं। बिक्री के अभाव में शासन के समर्थन मूल्य का लाभ उन्हें मौके पर नहीं मिल पा रहा है।
शासन ने धान खरीद में गड़बड़ी रोकने लिए 100 क्विंटल से अधिक मात्रा में धान बेचने वाले पंजीकृत किसानों के नाम व भूमि के सत्यापन का आदेश दिया है। आदेश के तहत शासन ने 100 से 300 क्विंटल तक धान बेचने वाले पंजीकृत किसानों के नाम व भूमि के सत्यापन की जिम्मेदारी संबंधित तहसीलदारों व उपजिलाधिकारियों को दी है। इसके ऊपर की मात्रा के सत्यापन का निर्देश एडीएम स्तर के अधिकारियों को दिया गया है। शासन की ओर से गड़बड़ी रोकने के लिए जारी किया गया यह आदेश किसानों के गले की फांस बना है।
आंकड़ों के मुताबिक जिले में 100 क्विंटल से अधिक मात्रा में अपना धान बेचने के लिए अभी तक 2305 किसानों ने पंजीकरण कराया है। अभी तक तहसीलदार, उपजिलाधिकारियों व अपर जिलाधिकारी की ओर से किसानों के नाम व भूमि का सत्यापन नहीं किए जाने से किसान रबी की बोआई के मौके पर अपनी गाढ़ी कमाई का धान क्रय केंद्रों पर नहीं बेच पा रहे हैं। इसकी वजह से किसानों को शासन के समर्थन मूल्य का लाभ नहीं मिल पा रहा है। सत्यापन नहीं किए जाने से बड़े काश्तकार परेशान हैं।
एडीएम, एसडीएम व तहसीलदार स्तर पर लटका सत्यापन
आंकड़ों के मुताबिक 2305 किसानों के नाम व भूमि का सत्यापन किया जाना है। इसमें अपर जिलाधिकारी स्तर से जिले की सभी तहसीलों के 130 किसानों, पांचों तहसीलों के उपजिलाधिकारियों की ओर से 1724 किसानों व पांचों तहसीलदारों की ओर से 451 किसानों के नाम व भूमि का सत्यापन किया जाना है। सत्यापन नहीं होने से ये किसान अपना हजारों क्विंटल धान नहीं बेच पा रहे हैं।