सुल्तानपुर। सुबह के आठ बजे मेडिकल कॉलेज की ओपीडी खुलते ही परिसर में मरीजों और तीमारदारों की भीड़ उमड़ पड़ी। पंजीयन काउंटर से लेकर डॉक्टर कक्ष और दवा वितरण केंद्र तक हर तरफ लंबी कतारें दिखीं। गर्मी और उमस के बीच कोई परचा बनवाने के लिए खड़ा रहा तो कोई दवा लेने के लिए। इलाज से ज्यादा जद्दोजहद लाइन में लगने को लेकर दिखी।
सोमवार को मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में 1980 नए मरीजों ने पंजीकरण कराया, जबकि करीब 1500 पुराने मरीज भी पहुंचे। भीड़ इतनी अधिक रही कि कई मरीज डॉक्टर को दिखाने के बाद फर्श और बेंच पर बैठ गए और दवा लेने के लिए तीमारदारों को कतार में लगा दिया।
फिजिशियन कक्ष के बाहर सबसे ज्यादा भीड़ दिखी। मरीज घंटों अपनी बारी का इंतजार करते रहे। डॉक्टर को दिखाने के बाद जब दवा काउंटर पहुंचे तो वहां भी लंबी लाइन मिली। एक दवा लेने में ही एक घंटे से ज्यादा समय लग गया।
पिता का इलाज कराने आए संजय ने बताया कि सांस की बीमारी से परेशान पिता लाइन में खड़े नहीं हो पा रहे थे, इसलिए खुद दवा लेने के लिए कतार में लगना पड़ा। राहुल ने बताया कि बुखार से पीड़ित चाचा को तीन जगह लाइन में लगना पड़ा, थकने के बाद उन्होंने खुद दवा लेने की जिम्मेदारी संभाली।
वहीं बुजुर्ग रामफेर दवा काउंटर के किनारे बैठे भीड़ कम होने का इंतजार करते दिखे। मरीजों का कहना है कि इलाज से ज्यादा परेशानी अव्यवस्था और लंबी कतारों से हो रही है। गर्मी में घंटों इंतजार से बुजुर्ग और गंभीर मरीज सबसे ज्यादा परेशान हैं।
जूनियर रेजीडेंट के भरोसे कई ओपीडी
मेडिकल कॉलेज से पीएमए संवर्ग के कई चिकित्सकों के रिलीव होने के बाद कई ओपीडी जूनियर रेजीडेंट के भरोसे संचालित हो रही हैं। कई जगह वरिष्ठ चिकित्सकों की मौजूदगी नहीं दिखी। मरीज जानकारी के अभाव में जेआर से इलाज कराकर लौट रहे हैं।
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सीएमएस बोले- व्यवस्था सुधारने का प्रयास
सीएमएस डॉ.अविनाश चंद्र गुप्ता ने बताया कि छुट्टी के बाद सोमवार को ओपीडी में मरीजों की संख्या अचानक बढ़ जाती है। इससे दवा वितरण में दबाव बनता है। व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।