सुल्तानपुर। जीवन का अर्द्धशतक बीत गया। तब के नई उम्र के खातेदार अब बुजुर्ग हो गए। उस समय के वृद्ध खतौनीधारकों ने दुनिया से विदा ले ली। उनके वारिस जोत के मालिक बन गए लेकिन गांवों में चकबंदी प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी। परिवार में बंटवारे के बाद कई टुकड़ों में बंटे खेतों को एक खंड में देखने की बुजुर्गों की इच्छा उनके जीवन का सपना ही बन गई है।
आजादी के बाद जिले के गांवों में पहले चरण की चकबंदी शुरू हुई थी। तब इन गांवों के खातेदारों के खेत टुकड़ों-टुकड़ों में बंटे थे। हालांकि काफी गांवाें में प्रक्रिया पूरी भी हो गई। लोगों के खेत एक या फिर दो जगह पर हो गए लेकिन जिले में 16 गांव ऐसे ठहरे जिनकी विभिन्न वर्षों में शुरू हुई चकबंदी प्रक्रिया आज तक पूरी नहीं हो सकी। इस बीच काफी अधिकारी-कर्मचारी भी आए, उनका तबादला हो गया। काफी संख्या में लोग सेवानिवृत्त भी हो गए लेकिन 1969 से शुरू हुई चकबंदी प्रक्रिया 50 साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी।
माता बदल सिंह के समय में कादीपुर तहसील क्षेत्र के मालापुर-जगदीशपुर में 10 सितंबर 1969 को चकबंदी प्रक्रिया शुरू हुई थी। कुछ वर्षों बाद उनकी मौत हो गई तो उनके पुत्र देवी प्रसाद सिंह के नाम खतौनी आ गई। उनकी भी मौत हुई तो खतौनी विजयभान सिंह व उनके भतीजे के नाम आ गई।
मौजूदा समय में विजयभान सिंह नगर पंचायत के चेयरमैन हैं। वे कहते हैं कि प्रक्रिया से आजिज आकर गांव के लोगों ने कोर्ट से स्थगन ले लिया, क्योंकि प्रक्रिया से तमाम बंदिशें थीं। इसी गांव के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे बाबू चंद्रबली सिंह के समय में चकबंदी शुरू हुई।
वे अब दुनिया में नहीं रहे। उनके पुत्र उदयराज सिंह का भी स्वर्गवास हो चुका है अब उनके पौत्र अरविंद व अवधेश सिंह चकबंदी प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं। पूर्व विधायक काशीनाथ भी इसी गांव के निवासी थे। जिनके निधन के बाद उनके पुत्रों के नाम भूमि आ गई लेकिन प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
वर्षों बाद भी चकबंदी प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर पहले चरण के 16 गांवों में अधिकांश लोग व्यवस्था से आजिज आ गए। परेशानी को देखते हुए आठ गांवों के लोगों ने कोर्ट से स्थगन आदेश ले लिया। दो गांवों में कोर्ट के आदेश पर जांच चल रही है। कादीपुर के बनबहा सिरखिनपुर के तो रिकॉर्ड ही अग्निकांड में जलना बता दिए गए। पांच गांवों में प्रक्रिया चल रही है।
बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी एके सिंह का कहना है कि कुछ गांवों में स्थगन आदेश है। अन्य गांवों में प्रक्रिया तेज चल रही है। पूर्व में कुछ दिक्कत रही होंगी। जिसकी वजह से अब तक निपटारा नहीं हो सका।