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अंतिम समय में आया बजट, खपाने में जुटे विभाग

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सुल्तानपुर। वित्तीय वर्ष के अंतिम समय में विभिन्न कार्यों, वेतन मद समेत अन्य योजनाओं के लिए जारी करीब पांच करोड़ रुपये धनराशि विभागीय अधिकारियों के लिए आफत बन गई है। विभागीय अधिकारी धनराशि को खपाने में जुट गए हैं। गुरुवार तक धनराशि खर्च न होने पर लैप्स होने का खतरा बना है। इसे लेकर विभागों में दिन भर काम चलता रहा।
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वित्तीय वर्ष 2021-2022 गुरुवार को समाप्त हो रहा है। पहले विधानसभा चुनाव व अब विधानपरिषद चुनाव की अधिसूचना से विभिन्न विभागों को नये कार्यों की स्वीकृतियां नहीं मिल सकी हैं। नये कार्यों की स्वीकृतियां न मिलने से शासन की ओर से चालू वित्तीय वर्ष मेें चल रहे विभिन्न विभागों के कार्यों के लिए मार्च के अंतिम समय में कई करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है। इसमें विभिन्न योजनाओं व कार्यों की धनराशि शामिल है।
लोक निर्माण विभाग में चल रहे नवीनीकरण कार्य के लिए करीब 20 लाख रुपये से अधिक की राशि जारी हुई है। इसमें प्रांतीय खंड व खंड तीन, दोनों विभागों का बजट है। इसके अलावा अन्य कार्यों के लिए भी धनराशि आवंटित हुई है। जिला प्रोबेशन विभाग में मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना सामान्य व कोविड योजना के लिए करीब 50 लाख रुपये से अधिक की राशि जारी हुई है। इसके अलावा अन्य गतिविधियों का बजट भी आवंटित हुआ है।
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कृषि एवं रक्षा इकाई के लिए कृषकों को अनुदान पर दिए जाने वाले विभिन्न सामान के लिए कई लाख रुपये आवंटित हुए हैं। बाल विकास विभाग में विभिन्न योजनाओं व वेतन मद की धनराशि करीब 50 लाख रुपये आवंटित हुई है। पंचायतराज विभाग में भी वेतन मद की राशि अंतिम समय में जारी हुई है। अधिकारियों के मुताबिक चालू वित्तीय वर्ष के अंतिम समय में विभिन्न योजनाओं व कार्यों के लिए पांच करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी हुई है।
वित्तीय वर्ष के अंतिम समय में शासन से जारी धनराशि विभागीय अधिकारियों के लिए आफत बन गई है। विभागीय अधिकारी योजनाओं की धनराशि लैप्स होने या फिर सरेेंडर करने से बचाने के लिए उसे खपाने में जुटे हैं। विभागों में विभिन्न योजनाओं व कार्यों की धनराशि खपाने के लिए दिन भर काम चलता रहा। ट्रेजरी में विभागों की ओर से धनराशि खारिज करने के लिए बिल लगाने का काम चल रहा था। इसके बाद भी कई विभागों का बजट खर्च न होने के आसार बने हैं।
जिलाधिकारी रवीश गुप्ता का कहना है कि प्रत्येक वर्ष मार्च में धनराशि आवंटित होती है। जारी धनराशि चालू कार्यों पर खर्च की जा रही है। धनराशि मिलने से कार्यों में गति आएगी।
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