विंदेश्वरीगंज। बल्दीराय की रामलीला धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का संगम बनी है। पिछले 63 वर्षों से लगातार मंचित हो रही रामलीला ने अब भव्य स्वरूप ले लिया है। नए कलाकारों को अभी भी कई पुराने कलाकार सहयोग देते हुए अपनी भूमिका निभा रहे हैं।
यहां की रामलीला की शुरुआत वर्ष 1962 में हुई थी। उस दौर में लकड़ी के तख्तों पर साधारण मंच तैयार कर पेट्रोमैक्स की रोशनी में रामलीला का मंचन किया जाता था। इस वर्ष रामलीला मंचन की शुरुआत 29 सितंबर से होगी। छह अक्तूबर तक चलने वाली रामलीला के आयोजन से जुड़ी तैयारियों को संचालक अंतिम स्वरूप देने में जुटे हैं।
रामलीला समिति के प्रबंधक आरपी सिंह ने बताया कि वर्ष 1978 में यहां नवयुवक रामलीला समिति का गठन हुआ, जिसके संस्थापक स्व. सिद्धनाथ सिंह रहे। समिति के गठन के बाद से यह परंपरा भव्य स्वरूप में निरंतर आगे बढ़ती जा रही है। आज भी कई वरिष्ठ कलाकार अपनी कला से रामलीला को जीवंत बनाए हुए हैं। कलाकार पारंपरिक वेशभूषा में अपना अभिनय करते थे। ग्रामीण दर्शकों का सीमित जमावड़ा होता था। वर्तमान में रामलीला का मंचन आकर्षक तरह से सजे पंडाल में बिजली की चकाचौंध के बीच नई तकनीक के इस्तेमाल के साथ होता है।
वरिष्ठ कलाकार रामलीला में करते मंचन
बल्दीराय की रामलीला में कई स्थानीय वरिष्ठ कलाकार आज भी मंचन करते हैं। इनमें 67 वर्षीय शिवकुमार गुप्ता विश्वामित्र बनते हैं, 68 वर्षीय कन्हैयालाल अग्रहरि हनुमान के रोल में, 66 वर्षीय कृष्णराम अग्रहरि नारद, 67 वर्षीय शिवकुमार कौशल गुरु वशिष्ठ और 69 वर्षीय गंगाराम अग्रहरि कुंभकरण की भूमिका निभाते हैं।
युवा कलाकार रामलीला में निभाएंगे किरदार
रामलीला समिति के अध्यक्ष कृष्ण राम अग्रहरि ने बताया कि इस बार रामलीला में राम का रोल अनिल जायसवाल, लक्ष्मण का अभिनय संजीव अग्रहरि, सीता का किरदार तिलकराज, भरत का रोल वेश अग्रहरि, शत्रुघ्न का अभिनय ध्रुव जायसवाल, विभीषण का अभिनय शिवमंगल कौशल और मेघनाथ का रोल रंगेश अग्रहरि अदा करेंगे।