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दुष्कर्म पीड़ित किशोरी के नवजात को बेचने में शामिल चार गिरफ्तार

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सुल्तानपुर। दुष्कर्म पीड़ित किशोरी के नवजात को बेचने में शामिल चाइल्ड लाइन की महिला कर्मी समेत चार लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपियों से पुलिस ने नवजात को मुक्त करा लिया।
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गोसाईंगंज क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली किशोरी का गांव के ही एक युवक से प्रेम प्रसंग था। 19 मार्च को किशोरी सुल्तानपुर रेलवे स्टेशन के पास जीआरपी को लावारिस हालत में मिली। बाल कल्याण विभाग ने किशोरी को शहर से सटे पांचोपीरन कस्बे में स्थित चाइल्ड लाइन के कर्मियों को सौंप दिया था। करीब पांच माह बाद जब किशोरी की काउंसिलिंग की गई तो पता चला कि उसके साथ दुष्कर्म किया गया था। वह गर्भवती है। पुलिस ने पीड़िता की तहरीर पर आरोपी युवक के खिलाफ केस दर्ज कर जेल भेज दिया था। चूंकि किशोरी गर्भवती थी इसलिए उसे चाइल्ड लाइन में रखकर देखरेख की जा रही थी। छह दिसंबर को चाइल्ड लाइन से किशोरी को शहर के करौंदिया मोहल्ले में स्थित एक नर्सिंग होम में प्रसव के लिए भर्ती कराया गया था, जहां ऑपरेशन के बाद किशोरी ने शिशु को जन्म दिया था। 13 दिसंबर को नवजात और किशोरी को नर्सिंग होम से डिस्चार्ज किया गया था।
चाइल्ड लाइन की महिला कर्मचारी तारा शुक्ला ने अन्य लोगों की साजिश से नवजात को बेच दिया था। पीड़िता ने जब कर्मियों से अपने शिशु के बारे में जानकारी मांगी तो उसे बताया गया था कि नवजात की मौत हो गई है और उसे दफना दिया गया है। पीड़िता ने चाइल्ड लाइन के कर्मियों पर अपने शिशु को बेचने का आरोप लगाते हुए बाल कल्याण समिति के सामने पेश होकर शिकायत की थी। बाल कल्याण समिति ने गोसाईंगंजपुलिस को पूरे मामले में केस दर्ज कर मामले की गहनता से जांच करने का आदेश दिया था। पुलिस ने चाइल्ड लाइन की महिला कर्मचारी तारा शुक्ला के खिलाफ केस दर्ज कर तफ्तीश शुरू की।
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एसपी डॉ. विपिन कुमार मिश्र ने बताया कि जांच के दौरान पता चला कि पीड़िता के प्रसव के दौरान विजय श्रीवास्तव निवासी शास्त्रीनगर कोतवाली नगर व तारा शुक्ला निवासी परसपुर थाना कुड़वार ने साजिश रचकर नवजात को बेच दिया। नवजात को कृपाशंकर गुप्ता और उसकी पत्नी रेनू गुप्ता निवासी लालगंज, रायबरेली मौजूदा पता बघराजपुर थाना कोतवाली नगर जिला सुल्तानपुर ने खरीदा था। एसओ गोसाईंगंज संदीप राय और स्वॉट प्रभारी मोहम्मद अकरम खां ने बृहस्पतिवार को शहर से सटे अमहट के पास से चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर नवजात को सकुशल मुक्त करा लिया। एसपी ने पुलिस टीम को 25 हजार का इनाम देने की घोषणा की।
योजनाबद्ध तरीके से शिशु को था बेचा : एसपी
एसपी ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों ने योजनाबद्ध तरीके से आपराधिक षडयंत्र रचकर रेनू गुप्ता पत्नी कृपा शंकर के नाम से दुष्कर्म पीड़िता को अस्पताल में भर्ती कराया था। उसी के नाम से बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र बनवाया गया। इस साजिश मुख्य कर्ताधर्ता विजय श्रीवास्तव थे, उन्होंने ही तारा शुक्ला के माध्यम से इस बच्चे के गर्भावस्था के दौरान देखरेख का खर्च तथा प्रसव का सारा खर्च भुगतान किया और बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र कृपा शंकर गुप्ता की वल्दियत से बनवा कर बच्चे को कृपा शंकर गुप्ता व रेनू गुप्ता के हाथों बेच दिया।
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