सुल्तानपुर। सदर तहसील में शनिवार को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में अधिकतर मामलों में प्रशासन की सुस्ती सामने आई है। कई मामले पुराने ही रहे, जिसमें फरियादियों को तहसील का चक्कर लगाना पड़ रहा है। किसी ने मुआवजा न मिलने तो किसी ने जमीन कब्जाने की शिकायत की। परिणाम वहीं, मामले को शिकायत कर्ताओं को सिर्फ आश्वासन मिला।
गिरा मकान, क्षतिपूर्ति के लिए तहसील का चक्कर
अमिलिया कला के उमाशंकर ने बताया कि 26 सितंबर को बारिश से घर गिर गया था। जिससे परिवार के सामने रहने की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। दैनिक जीवन भी प्रभावित हुआ है। आर्थिक रूप से कमजोर होने से अपना मकान नहीं बनवा सकते हैं। उन्होंने बताया कि 17 अक्तूबर को आवेदन दिया। प्रकरण की स्थलीय जांच कराकर नियमानुसार आपदा राहत राशि देने की गुहार लगाई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
खाते की जमीन पर विपक्षियों का कब्जा, दे रहे धमकी
मीरानपुर के 88 वर्षीय कामता प्रसाद मिश्र ने बताया कि उनके नाम से खाते की जमीन दर्ज है। विपक्षी और उनके बेटों सहित अन्य लोग जमीन पर कब्जा करने में बाधा डाल रहे हैं। 26 नवंबर 2025 को लेखपाल और कानूनगो ने रिपोर्ट तैयार की थी, जिसमें पत्थरनसब की कार्रवाई होने के बावजूद विपक्षी कब्जा नहीं दे रहे थे। पुलिस बल की मांग की गई, लेकिन वह उपलब्ध नहीं कराया गया। बताया कि विपक्षी उन्हें धमकी देते हैं और मनगढ़ंत रिपोर्ट बनाकर वापस कर दिया जाता है।
फर्जी वरासत से जमीन हड़पने का आरोप
लंभुआ के रायपुर गांव की शिवपत्ती ने अपने मृत पति की जमीन फर्जी तरीके से वरासत कराकर हड़पने का आरोप लगाया। शिवपत्ती ने बताया कि रायपुर गांव की निवासी हैं। उनके पति राम लोचन की मृत्यु हो चुकी है। शिवपत्ती और उनका पुत्र राकेश कुमार ही राम लोचन के एकमात्र वारिस हैं। महिला का आरोप है कि उर्मिला, मनोज कुमार और लवकुश ने खुद को राम लोचन का कथित उत्तराधिकारी बताया। उन्होंने राम लोचन की जमीन अपने नाम करा ली है। यह वरासत लेखपाल की मिलीभगत से विधि विरुद्ध ढंग से कराई गई है। अधिकारियों से इस प्रकरण को संज्ञान में लेकर कार्रवाई करने की मांग की।
हटवाया जाए सरकारी जमीन से अवैध कब्जा
विकना गांव के रामअभिलाख ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा हटवाने की गुहार लगाई है। उन्होंने बताया कि गांव के एक लोग नवीन परती अवैध कब्जा कर रखा है। तहसीलदार न्यायिक सुल्तानपुर के यहां वाद दायर किया गया था। न्यायालय ने 13 जुलाई 2015 को कब्जा करने वाले पर एक लाख रुपये का जुर्माना और दस रुपये निष्पादन शुल्क लगाया था। साथ ही, उन्हें बेदखल करने का भी आदेश दिया गया था। अभी तक न जुर्माना भरा गया और न कब्जा हटाया है। इससे घर आने-जाने का रास्ता बंद हो गया है।
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